पीरपैंती | सुंदरपुर कृषि मैदान में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के तीसरे दिन बुधवार को कथावाचक स्वामी आगमानंद महाराज ने सती प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा के दौरान उन्होंने कहा कि संसार में किसी का समय हमेशा एक जैसा नहीं रहता। आज जो व्यक्ति खुशियां मना रहा है, वही कल दुख का सामना भी कर सकता है, क्योंकि परिवर्तन ही संसार का नियम है।

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उन्होंने कहा कि मनुष्य की नीयत जैसी होती है, उसे वैसा ही फल प्राप्त होता है। इसलिए दुख के समय घबराने के बजाय धैर्य रखना चाहिए और सुख के समय अहंकार से बचना चाहिए। जीवन के हर परिस्थिति में परमात्मा का स्मरण करते रहना ही मानव का सबसे बड़ा सहारा है।

स्वामी आगमानंद महाराज ने कहा कि सच्चे मन से भगवान को याद करने वाले भक्तों की सहायता स्वयं प्रभु करते हैं। प्रह्लाद की भक्ति का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि भगवान ने नरसिंह अवतार लेकर अपने भक्त की रक्षा की थी। उन्होंने लोगों से फल की चिंता छोड़ कर्म पर विश्वास करने का संदेश दिया।

कथा श्रवण के लिए प्रमुख रूप से रश्मि कुमारी, पप्पू साह सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

By न्यूज़ डेस्क

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