भागलपुर शिक्षा विभाग में 98 लाख से अधिक की वित्तीय गड़बड़ी का आरोप, HRMS लॉगिन के दुरुपयोग से खुला मामला

भागलपुर। जिला शिक्षा विभाग में वेतन भुगतान से जुड़ी कथित वित्तीय गड़बड़ी का बड़ा मामला सामने आया है। संविदा ऑपरेटर के रूप में काम कर चुके अविनाश राज पर सरकारी राशि के 98 लाख 12 हजार 773 रुपये के कथित गबन का आरोप है। मामले की जांच में फर्जी शिक्षिका के नाम पर वेतन बिल तैयार कर राशि निकाले जाने और रकम को अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर किए जाने की बात सामने आई है। जांच टीम ने विभिन्न खातों में करीब 46 लाख रुपये होल्ड कराए हैं। वहीं, जमीन कारोबार से जुड़े गौतम कुमार के यूपीआई खाते में करीब 28 लाख रुपये मिलने की जानकारी दी गई है।

मामले ने शिक्षा विभाग की भुगतान प्रक्रिया, गोपनीय लॉगिन आईडी और पासवर्ड की सुरक्षा तथा कर्मचारियों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जांच एजेंसी अब बैंक खातों के लेन-देन, संदिग्ध भुगतान और संपत्ति खरीद से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल कर रही है।

2019 से स्थापना शाखा में कार्यरत था ऑपरेटर

बताया गया है कि अविनाश राज वर्ष 2019 से जिला शिक्षा विभाग की स्थापना शाखा में कार्यरत था। वर्ष 2021 में मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली (HRMS) लागू होने के बाद उसने वेतन बिल तैयार करने की प्रक्रिया में तकनीकी अनुभव हासिल किया। आरोप है कि इसी जानकारी का दुरुपयोग कर उसने विभागीय लॉगिन आईडी और पासवर्ड का इस्तेमाल करते हुए फर्जी भुगतान की प्रक्रिया अपनाई।

जानकारी के मुताबिक, 9 जून 2026 को सेवामुक्त किए जाने के बाद भी उसने लिपिक शिशिर कुमार झा की लॉगिन आईडी का कथित रूप से इस्तेमाल जारी रखा। आरोप है कि फर्जी शिक्षिका के नाम पर वेतन बिल तैयार कर सरकारी राशि अलग-अलग बैंक खातों में भेजी गई। इस मामले में लॉगिन आईडी के इस्तेमाल, भुगतान स्वीकृति और विभागीय स्तर पर निगरानी की भूमिका की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

जुलाई और अगस्त के भुगतान की जांच

वित्तीय दस्तावेजों से संबंधित उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जुलाई 2026 में कथित फर्जी शिक्षिका के नाम पर 43,62,168 रुपये और अगस्त 2026 में 46,95,775 रुपये के भुगतान बिल पास कराए गए। पूर्व के भुगतानों को मिलाकर कथित वित्तीय गड़बड़ी की कुल राशि 98,12,773 रुपये बताई गई है।

जांच का प्रमुख बिंदु यह है कि भुगतान किस स्तर पर तैयार किए गए, किसने उन्हें स्वीकृति दी और संबंधित बैंक खातों में रकम भेजने की प्रक्रिया कैसे पूरी हुई। इन सवालों के जवाब से यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित गड़बड़ी में किन लोगों की क्या भूमिका रही।

फरीदाबाद के बैंक खाते से दूसरे खातों में भेजी गई रकम

मिली जानकारी के अनुसार, कथित फर्जी भुगतान की राशि हरियाणा के फरीदाबाद स्थित भारतीय स्टेट बैंक के एक खाते में भेजी गई। इसके बाद यूपीआई के माध्यम से रकम को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर किए जाने की बात सामने आई है।

जांच में अविनाश राज, उसकी पत्नी काजल, जमीन कारोबारी गौतम कुमार और तनुजा देवी से जुड़े खातों में रकम पहुंचने की जानकारी दी गई है। हालांकि, इन खातों में प्राप्त राशि, उसके इस्तेमाल और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की पुष्टि विस्तृत बैंक जांच तथा अन्य साक्ष्यों के आधार पर की जानी है।

46 लाख रुपये होल्ड, 28 लाख रुपये के लेन-देन की पड़ताल

मामले का खुलासा होने के बाद जांच टीम ने कार्रवाई करते हुए विभिन्न बैंक खातों में मौजूद करीब 46 लाख रुपये की राशि होल्ड कराई। इसके अतिरिक्त, जमीन कारोबार से जुड़े गौतम कुमार के यूपीआई खाते में लगभग 28 लाख रुपये पाए जाने की जानकारी सामने आई है।

जांच टीम अब यह पता लगाने में जुटी है कि शेष रकम कहां गई और क्या कथित रूप से उससे जमीन, वाहन या अन्य महंगी वस्तुएं खरीदी गईं। इसके लिए बैंक स्टेटमेंट, संपत्ति के दस्तावेज और संदिग्ध लेन-देन का मिलान किया जा रहा है।

महंगी गाड़ियों और जमीन की खरीद भी जांच के दायरे में

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अविनाश राज की जीवनशैली और संपत्ति में पिछले कुछ वर्षों के दौरान बदलाव की बात भी जांच में सामने आई है। उसके पास दो कारें और एक बुलेट मोटरसाइकिल होने तथा अलग-अलग स्थानों पर जमीन खरीदने की जानकारी दी गई है।

दार्जिलिंग, मनाली और सिक्किम की यात्राओं का भी उल्लेख किया गया है। जांच के दौरान यह पता लगाना जरूरी होगा कि इन संपत्तियों और खर्चों का स्रोत क्या था तथा इनका कथित वित्तीय गड़बड़ी से कोई संबंध है या नहीं। केवल संपत्ति या महंगी जीवनशैली के आधार पर किसी लेन-देन को अपराध का प्रमाण नहीं माना जा सकता।

20 लाख रुपये लौटाने की पेशकश का दावा

विभागीय अधिकारियों से बातचीत के संबंध में सामने आई जानकारी के अनुसार, मामला उजागर होने के बाद अविनाश राज ने कथित तौर पर फोन पर वित्तीय गड़बड़ी स्वीकार की थी। यह भी दावा किया गया है कि उसने 20 लाख रुपये लौटाने की पेशकश की और प्राथमिकी दर्ज नहीं कराने की शर्त रखी।

हालांकि, इस कथित बातचीत की स्वतंत्र पुष्टि और उसका आधिकारिक रिकॉर्ड सामने आना महत्वपूर्ण होगा। विभाग ने कथित समझौते को स्वीकार नहीं किया और कानूनी कार्रवाई की दिशा में आगे बढ़ा।

बांका से पकड़े जाने की जानकारी

उपलब्ध विवरण के अनुसार, अधिकारियों के कड़े रुख के बाद अविनाश राज का मोबाइल फोन बंद हो गया था। बाद में जिला सूचना इकाई (डीआईओयू) की टीम ने उसे बांका से पकड़ा। मामले में अब कथित गबन की राशि, बैंक खातों के नेटवर्क, फर्जी भुगतान की प्रक्रिया और अन्य संभावित संलिप्त लोगों की भूमिका की जांच अहम है।

फिलहाल इस मामले में बैंक रिकॉर्ड, डिजिटल लॉगिन, भुगतान से जुड़े दस्तावेज और संपत्ति के स्रोत की जांच से ही पूरे घटनाक्रम की तस्वीर स्पष्ट होगी। आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।

📲 Naugachia News WhatsApp Group Join करें
Join Now →

By न्यूज़ डेस्क

न्यूज़ को शेयर करे और कमेंट कर अपनी राय दे.....

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

deneme bonusu