नवगछिया के साहू परवत्ता गांव की रहने वाली 21 वर्षीय सुषमा कुमारी अपने परिजनों के साथ जाह्नवी चौक घाट से भागलपुर के बरारी स्थित बियाडा जहाज घाट आने के लिए जहाज पर सवार हुई थीं। सफर के दौरान गंगा नदी के बीच अचानक उन्हें तेज प्रसव पीड़ा होने लगी। जहाज पर तत्काल प्रसव कराने की पर्याप्त चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण वह किसी तरह बाथरूम तक पहुंचीं, जहां उन्होंने बच्चे को जन्म दिया।
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बताया गया कि प्रसव समय से पहले हुआ था। जहाज के किनारे पहुंचने के बाद मां और नवजात की स्थिति को लेकर परिजनों और जहाज कर्मियों के बीच अफरा-तफरी मच गई।
घाट पर पहुंचते ही महिला चिकित्सक ने की जांच

घटना की जानकारी मिलते ही बियाडा घाट पर बने मेडिकल कैंप में तैनात महिला चिकित्सक डॉ. रौशनी प्रसाद जहाज पर पहुंचीं। उन्होंने मां और नवजात की प्राथमिक जांच की। समय से पहले जन्म लेने के कारण नवजात की हालत गंभीर बताई गई।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए घाट पर मौजूद कर्मियों और जिला नियंत्रण कक्ष के दंडाधिकारी शमीम अंसारी ने एंबुलेंस की व्यवस्था कराई। इसके बाद मां और नवजात को तत्काल मायागंज अस्पताल भेजा गया।
डॉक्टरों की कोशिशों के बावजूद नहीं बची नवजात की जान
मायागंज अस्पताल के स्त्री रोग एवं प्रसव विभाग में नवजात को बचाने के लिए डॉक्टरों ने प्रयास किया, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका। अस्पताल की हेल्थ मैनेजर आभा कुमारी के अनुसार, नवजात की मौत हो गई है। वहीं, सुषमा कुमारी की स्थिति फिलहाल स्थिर बताई गई है।
जल परिवहन में आपातकालीन चिकित्सा सुविधा की जरूरत
इस घटना ने नदी मार्ग से यात्रा करने वाले यात्रियों की सुरक्षा और आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता पर सवाल खड़े किए हैं। विक्रमशिला सेतु पर आवागमन प्रभावित होने के कारण जाह्नवी घाट और बियाडा घाट के बीच जल परिवहन कई यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण साधन बना हुआ है।
ऐसे में गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और गंभीर मरीजों के लिए यात्रा के दौरान आपातकालीन स्थिति से निपटने की व्यवस्था बेहद जरूरी है। जहाजों पर प्राथमिक चिकित्सा किट, प्रशिक्षित कर्मियों और आपातकालीन संपर्क व्यवस्था की उपलब्धता उपयोगी साबित हो सकती है।
घटना के बाद घाट पर तैनात मेडिकल टीम और प्रशासनिक कर्मियों की तत्परता से मां और नवजात को अस्पताल पहुंचाया गया। हालांकि, नवजात को नहीं बचाया जा सका। यह घटना नदी मार्ग से यात्रा करने वाले लोगों के लिए बेहतर चिकित्सा तैयारियों की आवश्यकता को रेखांकित करती है।
