नवगछिया में 22 भूमिहीन महादलित परिवारों को मिला बासगीत पर्चा, राघोपुर के कटाव पीड़ितों को भी मिलेगी जमीन
बसेरा अभियान-2 के तहत खरीक में शिविर का आयोजन, मंत्री कुमार शैलेंद्र ने कहा- भूमिहीनों को बसाने में लापरवाही बर्दाश्त नहीं
Total Downloads: 448
नवगछिया, निज संवाददाता। खरीक अंचल कार्यालय परिसर स्थित अंबेडकर भवन में रविवार को बसेरा अभियान-2 के तहत बासगीत पर्चा वितरण शिविर का आयोजन किया गया। शिविर का उद्घाटन पथ निर्माण मंत्री सह बिहपुर विधायक ई. कुमार शैलेंद्र और अंचलाधिकारी प्रवीण कुमार वत्स ने संयुक्त रूप से भूमिहीन महादलित परिवारों को बासगीत पर्चा प्रदान कर किया। इस दौरान कुल 22 परिवारों को पर्चा दिया गया।
इस मौके पर मंत्री ई. कुमार शैलेंद्र ने कहा कि सरकार भूमिहीन परिवारों को बसाने के लिए बसेरा अभियान के तहत प्राथमिकता के आधार पर काम कर रही है। राज्य में कोई भी भूमिहीन परिवार इस योजना के लाभ से वंचित नहीं रहेगा। जरूरत पड़ने पर सरकार जमीन खरीदकर भी ऐसे परिवारों को बसाने का काम करेगी।

उन्होंने कहा कि सरकार ने बिहार के सभी अंचलाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने क्षेत्र में भूमिहीन परिवारों की सूची तैयार कर प्राथमिकता के आधार पर उन्हें बासगीत पर्चा उपलब्ध कराएं। इस कार्य में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
मंत्री ने सभी अंचलाधिकारियों से सरकार के निर्देशों को गंभीरता से लेते हुए बसेरा अभियान के उद्देश्यों को पूरा करने की अपील की। उन्होंने कहा कि भूमिहीन परिवारों को जमीन उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
राघोपुर के कटाव पीड़ितों को एक सप्ताह में पर्चा वितरण शुरू करने का निर्देश
शिविर के दौरान मंत्री ने खरीक सीओ प्रवीण कुमार वत्स को राघोपुर के सभी कटाव पीड़ित परिवारों के लिए जल्द से जल्द सरकारी जमीन चिह्नित कर उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि कटाव से प्रभावित परिवारों को प्राथमिकता के आधार पर बसाने की व्यवस्था की जाए, ताकि उन्हें सुरक्षित आश्रय मिल सके।
इस पर सीओ प्रवीण कुमार वत्स ने बताया कि कटाव पीड़ित परिवारों के लिए जमीन चिह्नित कर ली गई है। उन्होंने आश्वासन दिया कि एक सप्ताह के अंदर आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर कटाव पीड़ित परिवारों के बीच भी बासगीत पर्चा वितरण शुरू कर दिया जाएगा।
सरकार की इस पहल से भूमिहीन परिवारों के साथ-साथ राघोपुर के कटाव पीड़ितों को भी जमीन मिलने की उम्मीद जगी है।
