पटना : बिहार के सीएम नीतीश कुमार आज अपना मंत्रिमंडल का विस्तार करने जा रहे हैं. लेकिन उनके मंत्रिमंडल विस्तार करने से पहले ही एनडीए में घमासान मच गया है. लोजपा से पशुपति नाथ पारस का नाम सामने आने पर मांझी ने कड़ा प्रतिरोध दर्ज कराया है. वही रालोसपा को इस मंत्रिमंडल से बाहर रखा गया है.
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रालोसपा के तरफ से हरलाखी विधायक सुधांशु शेखर का नाम सामने आ रहा था लेकिन आखिरी समय में उनका नाम इस सूची से बाहर कर दिया गया है. कहा जा रहा है कि उपेन्द्र कुशवाहा ने विरोधी गुट(अरुण गुट) के विधायक ललन पासवान का नाम सामने आने पर अपने विधायक नाम आगे किया था जिसपर सीएम नीतीश कुमार ने असहमति जताते हुए लिस्ट से बाहर कर दिया है.

बताया जाता है कि नीतीश कुमार का उपेन्द्र कुशवाहा से छतीस का आकड़ा रहने के कारण कुशवाहा को बाहर का रास्ता दिखा दिया है. कहा यह भी जा रहा है कि बीजेपी जदयू के साथ आने के बाद बीजेपी अब धीरे-धीरे अपने घटक दलों को बाहर का रास्ता दिखाना शुरू करना शुरू कर दिया है. इससे पहले मीडिया से बातचीत में मांझी ने कहा कि अगर लोजपा से पशुपति नाथ पारस का नाम सामने आता है तो ‘हम’ से भी एक नाम पर विचार करना चाहिए. मांझी ने कहा कि मैंने तीन नाम सुझाये है इनमें से किसी एक को मंत्रिपद दिया जाना चाहिए.
मांझी ने इसके पीछे तर्क दिया कि हमसे बातचीत में कहा गया था कि जो भी मंत्री होंगे वह या तो विधानसभा या विधानपरिषद के सदस्य होंगे चुकीं पशुपति नाथ पारस इन दोनों सदनों के सदस्य नहीं है तो उन्हें क्यों मंत्री पद दिया जा रहा है. मांझी के बगावती सुर को देखते हुए मंत्रीमंडल का गठन इतना आसान नहीं होगा.

