जिस प्रोजेक्ट का करीब तीन वर्ष पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार उद्घाटन कर चुके हैं, वह अभी तक पूरी तरह से व्यवहार में नहीं आया है। भागलपुर जिले को कोसी से जोड़ने वाला विजय घाट पुल का उद्घाटन हो गया लेकिन संपर्क पथ का भू- अर्जन अभी तक नहीं हो पाया है। इसमें एक के बाद एक सरकारी पेंच फंसा हुआ है। अब नवीनतम पेंच यह है कि पथ निर्माण विभाग से मुआवजे के भुगतान के लिए सहमति मांगी गई है।
पथ निर्माण विभाग ही अधियाची विभाग है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि सहमति नहीं मिलेगी। लेकिन औपचारिकता की वजह से रोज एक-एक दिन कार्रवाई आगे बढ़ रही है। पथ निर्माण विभाग की सहमति या एनओसी मिलने के बाद किसानों की राशि नवगछिया के एसडीओ को ट्रांसफर कर दी जाएगी। जिला भू अर्जन पदाधिकारी की मानें तो मुआवजे की राशि के भुगतान के लिए प्रशासन तैयार है। किसानों व रैयतों की सूची बन गई है।
मालूम हो कि जिला प्रशासन इस तैयारी में है कि किसानों को राशि देकर उनसे जमीन ले लिया जाए और उस पर कब्जा कर वहां संपर्क पथ का निर्माण शुरु कर दिया जाए। प्रमंडलीय आयुक्त राजेश कुमार ने कहा है कि जमीन मिलने के बाद अधिक से अधिक तीन महीने में संपर्क पथ तैयार हो जाएगा। इससे यातायात सुगम हो जाएगा। इसके पूर्व राजस्व विभाग के प्रधान सचिव को भुगतान की अनुमति के लिए पत्र लिखा गया था।

विजय घाट में कुल 92 रैयतों को भूअर्जन की राशि का भुगतान करना है। इसके लिए सरकार ने 21 करोड़ रुपये का आवंटन किया है। भू अर्जन ने आयुक्त को जनवरी माह में भुगतान के लिए प्रस्ताव दिया था। आयुक्त ने मुआवजे की गणना 22 जनवरी तक कराई थी। भुगतान के पूर्व की प्रक्रिया अवार्ड घोषित हो चुका है। सिर्फ राशि का भुगतान शेष रह गया है।


