नवगछिया : जगतपुर झील को पर्यटन स्थल बनाने में रैयती जमीन का रोड़ा सामने आया है। वन एवं पर्यावरण मंत्री के निर्देश के बाद जब जमीन की पैमाइश कराई गई तो इसमें 80 फीसदी रैयती जमीन सामने आ गयी है। नवगछिया के सीओ ने जगतपुर झील का नजरी नक्शा तैयार किया है। जिसकी रिपोर्ट मुख्यालय भेजी गई है। इसमें 80 प्रतिशत रैयती और मात्र 20 प्रतिशत ही सरकारी भूमि का होना बताया गया है। ऐसे में परियोजना के ठंडे बस्ते में जाने की संभावना बढ़ गई है। डीडीसी प्रतिभा रानी ने बताया कि नजरी नक्शा पर थोड़ा भ्रम है। क्योंकि यदि इतनी रैयती जमीन पर अब तक कोई दावेदार सामने नहीं आया है। ऐसे में हकीकत जानने वह बुधवार को नवगछिया अंचल जाएंगी और अभिलेखों को देखेंगी। उसके बाद ही तय होगा कि पर्यटन स्थल बनाने के अन्य विकल्प क्या हो सकते हैं? जगतपुर झील को पर्यटन स्थल बनाने की घोषणा 2019-20 में ही प्रशासनिक तौर पर हुई थी।
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सीओ सीमांकन कराकर दें जमीन, मनरेगा से होगा काम: पीओ
डीएम ने झील के कायाकल्प का जिम्मा मनरेगा को दिया है। मनरेगा के साथ दिक्कत यह है कि निजी जमीन पर कैसे सरकारी काम शुरू कराएं। नवगछिया के कार्यक्रम पदाधिकारी ने सीओ को इस बाबत पत्र भी दिया है। उन्होंने पत्र में साफ कहा कि सरकारी जमीन का सीमांकन नहीं होने से मनरेगा से कोई काम नहीं हो पा रहा है। जबकि यह डीएम की महत्वाकांक्षी योजना है। इधर, जगतपुर की मुखिया सोनी भारती ने बताया कि हाल ही में झील की सफाई कराई गई थी। झील की सफाई के बाद ही रैयती जमीन की भी जानकारी मिली। जिसे लेकर उन्होंने मनरेगा के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी को भी सूचित किया है।
कई तालाब बना फ्लोटिंग व मत्स्यपालन का मुखिया का सुझाव
मुखिया ने बताया कि मनरेगा से यदि बड़ी योजना को शुरू करने में दिक्कत है तो हमलोग वहां तालाब की खुदाई कर झील का रूप देने की सोच रहे हैं। सरकारी जमीन और भूदान वाली जमीन पर बड़ा तालाब बनाया जाएगा। जबकि रैयती जमीन पर छोटा तालाब। तालाब बनने से मत्स्यपालन को बढ़ावा मिलेगा। इससे रैयतों को रोजगार भी मिलेगा। तालाब पर भी विदेशी पक्षियों का बसेरा बन सकेगा। बड़े तालाब में फ्लोटिंग शुरू करके पर्यटकों को आकर्षित किया जा सकता है। मुखिया प्रतिनिधि प्रदीप कुमार यादव ने बताया कि 16 मई को वह वन एवं पर्यावरण मंत्री नीरज कुमार सिंह से पटना में मिलकर ज्ञापन दिया था। इसमें अनुशंसा के बाद भी झील के रूप में विकसित नहीं करने की बात कही गई थी। मंत्री ने आश्वासन दिया था कि हर हाल में जगतपुर झील का विकास होगा। अभी इस झील के एक हिस्से में विभाग द्वारा मछली पालन भी हो रहा है। मत्स्य विभाग और वन विभाग भी यदा-कदा झील पर हक जताते रहता है।

