नई दिल्ली: रेलवे में छोटी-छोटी अनियमितताओं को लेकर दर्ज होने वाले हजारों मुकदमों और लंबी कानूनी प्रक्रिया को कम करने के लिए केंद्र सरकार ने रेलवे अधिनियम, 1989 में महत्वपूर्ण संशोधन किया है। यह बदलाव जन विश्वास अधिनियम, 2023 के तहत किया गया है, जिसके बाद कई मामलों में जेल की बजाय सीधे जुर्माना (पेनल्टी) लगाने का प्रावधान लागू होगा।
नई व्यवस्था के तहत बिना टिकट यात्रा, रेलवे स्टेशन और यात्री क्षेत्र में अनधिकृत प्रवेश, ट्रेन या स्टेशन परिसर में धूम्रपान, अवैध हॉकिंग, भीख मांगना और खतरनाक सामान लेकर यात्रा करने जैसे मामलों में अब मौके पर ही पेनल्टी वसूली जाएगी। जुर्माना नहीं भरने की स्थिति में ही मामला अदालत भेजा जा सकेगा।
बिना टिकट यात्रा पर सख्त कार्रवाई
रेलवे अधिनियम की धारा 137 के तहत बिना टिकट या धोखाधड़ी से यात्रा करने वालों से अतिरिक्त किराया और शुल्क के साथ 500 रुपये या सरकार द्वारा निर्धारित राशि वसूली जाएगी। यदि यात्री भुगतान नहीं करता है तो उसके खिलाफ मामला दर्ज कर छह माह तक की जेल, जुर्माना या दोनों सजा दी जा सकती है।

भीख मांगने और धूम्रपान पर बढ़ी पेनल्टी
संशोधित नियमों के अनुसार रेलवे स्टेशन और ट्रेनों में भीख मांगने पर धारा 144 के तहत 2000 रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है। बार-बार नियम तोड़ने वालों को एक वर्ष तक की जेल और 5000 रुपये तक के जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है।
वहीं, धारा 167 के तहत ट्रेन या स्टेशन परिसर में धूम्रपान करते पकड़े जाने पर 2000 रुपये तक पेनल्टी, टिकट जब्त करने और परिसर से बाहर निकालने की कार्रवाई की जा सकती है।
अनधिकृत प्रवेश पर भी जुर्माना
धारा 147 के तहत रेलवे के यात्री क्षेत्र में बिना अनुमति प्रवेश करने वालों पर 500 रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा। इसका उद्देश्य स्टेशन परिसरों में सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखना है।
आरपीएफ को मिली अतिरिक्त शक्तियां
नए नियमों के बाद रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) को कई मामलों में मौके पर ही कार्रवाई करने का अधिकार दिया गया है। साथ ही नियमों को प्रभावी ढंग से लागू कराने और आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने की अतिरिक्त शक्तियां भी प्रदान की गई हैं।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि बड़ी संख्या में ऐसे मामले अदालतों में लंबित हैं, जिनमें अपराध गंभीर नहीं हैं। नए प्रावधानों से अदालतों पर बोझ कम होगा और रेलवे प्रशासन को भी राहत मिलेगी।

