भागलपुर जिले में चमकी बुखार(एईएस) ने दस्तक दे दी है। सात दिनों के अंदर जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज सह अस्पताल(जेएलएनएमसीएच) में चमकी बुखार के पांच मरीज भर्ती हो चुके हैं, लेकिन यहां पर जांच की व्यवस्था नहीं है।
दूसरी तरफ पीकू में आठ और नीकू में 28 और इमरजेंसी के शिशु वार्ड में 10 बेड ही हैं, जो पूरी तरह से भरा हुआ है। इन बेडों पर चमकी के साथ अन्य बीमार बच्चे भी भर्ती हैं। ऐसे में अगर चमकी बीमारी ने कहीं पिछले साल की तरह अपना रौद्र रूप दिखाया तो जेएलएनएमसीएच में इलाज व जांच तो दूर बेड मिलना भी मुहाल हो जायेगा।
जेएलएनएमसीएच के पीजी रोग विभाग के प्रोफेसर डॉ. आरके सिन्हा ने बताया कि एक सप्ताह में पांच चमकी से पीड़ित बच्चे इलाज के लिए भर्ती हो चुके हैं। बीमार बच्चे बिहपुर, खरीक, कहलगांव व गोपालपुर क्षेत्र के रहने वाले हैं। इन बच्चों की उम्र पांच से 12 साल के बीच है। ये बीमार बच्चे लीची उत्पादित क्षेत्रों के साथ-साथ बहुत ही गरीब तबके से हैं।

हालांकि डॉ. सिन्हा ने कहा कि चमकी बीमारी (एक्यूट इंस्फेलाइटिस सिंड्रोम) का संबंध हाइपोग्लाइसीमिया से है। हाइपोग्लाइसीमिया कोई लक्षण नहीं, बल्कि दिमागी बुखार का संकेत है। अब तक पांच चमकी के बीमार बच्चों का संबंध हाइपोग्लाइसीमिया के साथ पाया गया है। यह हाइपोग्लाइसीमिया कुपोषण और पौष्टिक आहार की कमी के कारण होता है।
फिर लक्षण के आधार पर होगा चमकी का इलाज
पिछले साल चमकी की भयावहता के कारण एसकेएमसीएच मुजफ्फरपुर में तो एईएस की जांच के लिए लैब खुल गयी। 100 बेड का पीकू अस्पताल भी खुल गया, लेकिन भागलपुर में चमकी की जांच की व्यवस्था ही नहीं है। ऐसे में जेएलएनएमसीएच के चिकित्सकों को चमकी के बीमार बच्चों का इलाज लक्षण के आधार पर ही करना होगा। डॉ. सिन्हा ने कहा कि जब तक यहां पर जेई, एईएस जांच की सुविधा नहीं होती है, तब तक चमकी का बेहतर इलाज का दावा नहीं किया जा सकता है।
पिछले साल नौ मासूम की हुई थी चमकी से मौत
2019 में दो अगस्त तक जेएलएनएमसीएच में भर्ती नौ मासूम बच्चों की मौत चमकी से हो गयी थी। इसके अलावा नवगछिया, पीरपैंती, जगदीशपुर, सुल्तानगंज, कहलगांव, सन्हौला प्रखंड के विभिन्न गांवों से करीब 37 बच्चे चमकी के लक्षण लिए अस्पताल में भर्ती हुए थे। इनमें से सात बच्चे पटना के लिए रेफर किये गये थे, जबकि अन्य स्वस्थ होकर अपने घर को गये थे।
15 जून से 25 बेड का शिशु रोग विभाग में खुलेगा इंडोर: अधीक्षक
जेएलएनएमसीएच के अधीक्षक डॉ. आरसी मंडल ने कहा कि चमकी या फिर एईएस जांच की सुविधा शासन स्तर होगी तभी यहां पर हो पायेगा। हां, बीमार बच्चों के लिए बेड की कमी है। सोमवार से पीजी शिशु रोग विभाग के इंडोर में 25 बेड का एक वार्ड शुरू करा दिया जायेगा।
ये हैं चमकी बीमारी के लक्षण
– तेज बुखार, शरीर में ऐंठन व शुगर लेवल का अचानक कम होना
– तंत्रिका तंत्र का काम करना बंद कर देना
– तेज बुखार के साथ बेहोश हो जाना, चमकी आना
– जबड़े व दांत का कड़ा हो जाना, घबराहट होना
इन बातों का हमेशा रखें ध्यान
– बच्चे को रात में सोने से पहले जरूर खाना खिलाएं
– सुबह उठते ही बच्चे को भी जगाओ। देखों कहीं बेहोशी या चमक तो नहीं
– चमकी आने पर बच्चे को पानी पिलाते रहें
– तेज बुखार होने पर पूरे शरीर को ताजा पानी से पोछें
– बदन से कपड़ा निकाल दें, लगातार ओआरएस या फिर नमक-चीनी का घोल पिलाते रहें
– बेहोशी या चमक दिखते ही तुरंत एंबुलेंस या अन्य वाहन से अस्पताल लेकर जायें


