कोविड-19 प्रकोप के बीच डॉक्टर अब मरीजों पर पड़ने वाले प्रभावों के संबंध में चिंतित हैं। रिसर्च से पता लगा है कि लगभग 10% मरीज कई माह तक थकान, दिमागी भ्रम, कमजोर याद्दाश्त और शरीर में दर्द जैसे लक्षणों से पीड़ित हैं। शरीर की ऐसी स्थिति पर अमेरिका में कुछ साल पहले रिसर्च हो चुकी है। उस समय लोगों ने रिसर्च के नतीजों पर ध्यान नहीं दिया था। शोधकर्ताओं के निष्कर्षों को वायरस महामारी ने सही ठहराया है।
स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के एक रिसर्च ग्रुप ने माइएल्जिक एेंसीफेलोमाइलिटिस/क्रॉनिक फटीग सिंड्रोम (एमई/सीएफएस) का अध्ययन किया था। जेमी सेल्टजर ने प्रोजेक्ट के लिए पैसा जुटाने सहित कई अन्य कामों में सहायता दी थी। जेमी सहित 25 लाख अमेरिकी इस स्थिति से प्रभावित थे। इसके कारण छह माह या उससे लंबे समय तक थकान सहित अन्य समस्याएं हो सकती हैं। सेल्टजर और उनके सहयोगी अक्सर सोचते थे कि उन लोगों की रिसर्च को लोग कब गंभीरता से लेंगे। चूंकि एमई/सीएफएस जैसी स्थिति वायरल संक्रमण के बाद होती है, इसलिए शोधकर्ताओं को आशंका थी कि कोई विनाशकारी व्यापक बीमारी ही वैज्ञानिक समुदाय का ध्यान इस ओर खींचेगी। कई चिकित्सक इस स्थिति के संबंध में पूरी तरह वाकिफ नहीं हैं। यह भी सोचा जाता था कि ऐसे लक्षण मनोवैज्ञानिक हैं।

स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के एक रिसर्च ग्रुप ने माइएल्जिक एेंसीफेलोमाइलिटिस/क्रॉनिक फटीग सिंड्रोम (एमई/सीएफएस) का अध्ययन किया था। जेमी सेल्टजर ने प्रोजेक्ट के लिए पैसा जुटाने सहित कई अन्य कामों में सहायता दी थी। जेमी सहित 25 लाख अमेरिकी इस स्थिति से प्रभावित थे। इसके कारण छह माह या उससे लंबे समय तक थकान सहित अन्य समस्याएं हो सकती हैं। सेल्टजर और उनके सहयोगी अक्सर सोचते थे कि उन लोगों की रिसर्च को लोग कब गंभीरता से लेंगे। चूंकि एमई/सीएफएस जैसी स्थिति वायरल संक्रमण के बाद होती है, इसलिए शोधकर्ताओं को आशंका थी कि कोई विनाशकारी व्यापक बीमारी ही वैज्ञानिक समुदाय का ध्यान इस ओर खींचेगी। कई चिकित्सक इस स्थिति के संबंध में पूरी तरह वाकिफ नहीं हैं। यह भी सोचा जाता था कि ऐसे लक्षण मनोवैज्ञानिक हैं।
अमेरिका में कोरोना वायरस से स्वस्थ होने के बाद कई मरीज लंबे समय तक थकान, कमजोर याद्दाश्त और शरीर दर्द झेल रहे हैं। प्रभावित लोगों का कहना है कि कई डॉक्टर उनकी तकलीफ पर विश्वास नहीं करते हैं। कुछ लोगों ने तो डॉक्टरों के रूखे व्यवहार की शिकायत भी की है। अब ऐसी समस्याओं की शिकायत करने वाले लोगों की संख्या बढ़ रही है। ब्रिघम वुमन्स हॉस्पिटल, बोस्टन के डॉ. एंथोनी कोमारोफ 1980 से एमई/सीएफएस मरीजों का इलाज कर रहे हैं। वे कहते हैं, अब कोई इस पर संदेह नहीं कर सकता है। इस स्थिति से अमेरिका में लाखों लोग पीड़ित होंगे। एमई/सीएफएस का अध्ययन कर रही नेशनल हेल्थ इंस्टीट्यूट के डॉ. अवींद्रनाथ का कहना है, शोधकर्ताओं को कोरोना पीड़ितों की इस स्थिति का गहराई से अध्ययन करने का मौका मिलेगा।


