अनुमंडल के किसान प्रकृति की दोहरी मार झेलने को विवश हैं। हजारों एकड़ खेतों में अब भी बाढ़ का पानी फंसा हुआ है। इससे इस बार रबी फसलों की बुआई इन खेतों में किसान नहीं कर पाएंगे। बाढ़ से बर्बाद हुई भदई फसलों के कारण किसानों की कमर पहले ही टूट चुकी है। अब रबी फसल की बुआई नहीं होगी तो उनके सामने भुखमरी की समस्या उत्पन्न हो जाएगी। सबसे दयनीय हालत इस्माइलपुर और गोपालपुर प्रखंड के किसानों की है।
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इस्माइलपुर नारायणपुर लक्ष्मीपुर दियरा, पूर्वी भिट्ठा, इस्माइलपुर दियरा के चार सौ किसानों के खेतों में बाढ़ का पानी फंसा हुआ है। किसानों ने बताया कि पहले इस्माइलपुर बिंद टोली बांध नहीं था तो पानी आसानी से गंगा नदी में चला जाता था, लेकिन बांध बनने के बाद पानी निकलने का रास्ता नहीं है। वहीं गोपालपुर प्रखंड के डिमहा दियरा और गंगा प्रसाद धार सहित अन्य इलाकों में बाढ़ का पानी हजारों एकड़ में फंसा हुआ है। अब भी खेतों में कमर भर या उससे अधिक पानी है। ऐसी स्थिति में किसान इस बार रबी की खेती नहीं कर पाएंगे।

खेतों से पानी निकालने का वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी : एसडीओ
किसानों ने प्रशासन से खेतों में फंसे बाढ़ के पानी की निकासी के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने की मांग की है। किसान सुनील प्रसाद सिंह ने बताया के रबी फसल की बुआई नवंबर से दिसंबर माह में होती है। लेकिन गंगाप्रसाद धार में ज्यादा पानी हो जाने से इस बार फसल का होना संभव नही हैं। गोपालपुर सीओ मो. फिरोज इकबाल ने बताया कि गंगा प्रसाद धार इलाके का पानी निकासी को लेकर वरीय पदाधिकारी को अवगत कराएंगे। वहीं एसडीओ मुकेश कुमार ने बताया कि धार के पानी के निकासी का कोई वैकल्पिक रास्ता होगा तो इस पर पहल की जाएगी।

