नवगछिया। गंगा नदी के तट पर बसे गोपालपुर थाना क्षेत्र के सैदपुर गांव में स्थित करोड़ी दुर्गामंदिर श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का प्रतीक है। मां दुर्गा की इस पावन स्थली को लेकर दूर-दराज के क्षेत्रों तक भक्तों में गहरी श्रद्धा है। मान्यता है कि जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से मां के दरबार में माथा टेकता है और झोली फैलाकर अपनी मनोकामना रखता है, माता उसकी मुराद अवश्य पूरी करती हैं।

60 साल पहले हुई थी शुरुआत

ग्रामीणों के अनुसार लगभग 60–65 वर्ष पूर्व इस मंदिर की स्थापना की गई थी। उस समय गोपालपुर थाना के तत्कालीन थानेदार आनंदी सिंह ने स्थानीय प्रबुद्ध ग्रामीणों से विचार-विमर्श कर ठीठर गोसाई की जमीन पर एक अस्थायी मंदिर का निर्माण कराया। उसी समय पूरे विधि-विधान और मंत्रोच्चारण के साथ माता की प्रतिमा स्थापित कर पूजा-अर्चना का शुभारंभ हुआ। धीरे-धीरे यह स्थान पूरे क्षेत्र में आस्था का बड़ा केंद्र बन गया।

भव्य मंदिर का निर्माण

समय के साथ श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती गई। इसी बीच मंदिर कमिटी का गठन हुआ। वर्तमान अध्यक्ष महेश कुंवर के कुशल नेतृत्व में श्रद्धालुओं और समाजसेवियों के सहयोग से लगभग पाँच करोड़ रुपये की लागत से माता का भव्य मंदिर तैयार किया गया। विशाल प्रांगण, आकर्षक शिखर और वैष्णव पद्धति से होने वाली नियमित पूजा ने मंदिर को और भी विशेष बना दिया है।

मेले की परंपरा और बाढ़ की चुनौती

हर साल नवरात्र और दुर्गापूजा के अवसर पर यहां विशाल मेला आयोजित होता है। श्रद्धालु न केवल आसपास के जिलों से बल्कि दूर-दराज के इलाकों से भी यहां पहुंचते हैं। महिलाओं और युवतियों की भी भारी भीड़ माता के दरबार में उमड़ती है। हालांकि, इस बार लगातार तीसरी बार गंगा नदी की बाढ़ के कारण मेले के आयोजन में कठिनाई आ रही है। मंदिर परिसर और आसपास की जगह पानी से घिर जाने के कारण श्रद्धालुओं को परेशानी झेलनी पड़ रही है।

दो देवियों का मिलन चर्चा का विषय

स्थानीय लोगों के बीच इस बार की सबसे बड़ी चर्चा का विषय “दो देवियों का मिलन” है। गंगा की बाढ़ के पानी में मंदिर का प्रतिबिंब बनने और आसपास देवी स्वरूपों से जुड़े आस्थामय दृश्यों ने भक्तों को और भी भावुक बना दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि माता स्वयं अपने भक्तों की परीक्षा लेती हैं और कठिन परिस्थितियों में भी उनकी रक्षा करती हैं।

भक्तों की अटूट आस्था

परेशानियों के बावजूद श्रद्धालुओं की भीड़ लगातार बनी रहती है। भक्तगण माता के दरबार में नारियल, चुनरी और प्रसाद चढ़ाकर अपनी मनोकामनाएं पूरी होने की प्रार्थना करते हैं। स्थानीय लोग बताते हैं कि कई बार गंभीर रोगों से पीड़ित लोग यहां मन्नत मांगते हैं और ठीक होने पर पुनः माता के दरबार में आकर आभार प्रकट करते हैं। यही वजह है कि करोड़ी दुर्गामंदिर की ख्याति न केवल नवगछिया और भागलपुर जिले तक सीमित है, बल्कि सहरसा, कटिहार, मधेपुरा और यहां तक कि पड़ोसी राज्य झारखंड से भी लोग यहां दर्शन करने आते हैं।

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By न्यूज़ डेस्क

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