नाथनगर स्थित मनसकामनानाथ मंदिर में सावन में होने वाली पूजा की तैयारी शुरू हो गयी है। यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु सुल्तानगंज से जलभर भगवान शंकर को जलाभिषेक करते हैं। 17 जुलाई से शुरू हो रहे सावन को ले मंदिर को आकर्षक ढंग से सजाया जा रहा है। साल में एक बार मंदिर में सतचंडी महायज्ञ भी होता है। पंडित माना शुक्ला ने बताया कि सावन में रोज भगवान का शृंगार, रुद्राभिषेक व रात्रि में महाआरती की जाएगी।

देश-विदेश में रह रहे श्रद्धालु महाआरती मोबाइल के माध्यम से लाइव देख सकेंगे। 14 जुलाई को भगवान को प्रसन्न करने के लिए महाकाल की पूजा की जाएगी। प्रत्येक सोमवार को महाआरती, झांकी व प्रसाद का वितरण किया जायेगा। रोज भगवान को विशेष रूप से भोग लगाया जायेगा। सोमवारी को ले बाबा मनसकामनानाथ मंदिर कमेटी की ओर से सुरक्षा के कड़े प्रबंध किये जा रहे हैं। महिला व पुरुष पुलिस के अलावा कमेटी के सदस्य श्रद्धालुओं को पूजा कराने व उनकी सुरक्षा में मुस्तैद रहेंगे। .

मनोकामना पूरी होने पर रखा गया मंदिर का नाम:

पंडित माना शुक्ला ने बताया कि यहां दूर-दराज से लोग मन्नत मांगने आते हैं। यहां मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इसलिए मंदिर का नाम मनसकामनानाथ मंदिर पड़ा है। मंदिर में भगवान शिव-पार्वती के अलावा केदारनाथ, भगवान गणेश, रामदरबार, भंडारी बाबा, बजरंगबली, दुर्गा मां, संतोषी मां, काली मां, मां अन्नपूर्णा की प्रतिमाएं हैं।.

प्राचीन है मंदिर का इतिहास:

बाबा मनसकामनानाथ मंदिर की नींव 10वीं सदी में नाथ सम्प्रदाय ने रखी थी। अंग प्रदेश के राजा रोमपाद के चौथे वंश के राजा चंप ने मंदिर का जीर्णोद्धार किया था। उसके बाद यह मंदिर शिव-पार्वती की आराधना का केंद्र बना हुआ है। मंदिर में स्थापित प्रतिमाएं प्राचीन हैं। पंडित ने बताया कि शिवलिंग किस काल की है और इसकी कब स्थापना की गयी थी, इसकी जानकारी नहीं है। दावा किया जाता है कि 10वीं सदी की यहां मूर्ति है। .

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By न्यूज़ डेस्क

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