शहर के प्राइवेट आईटीआई के संचालक करोड़ों की कमाई कर रहे हैं। एक सत्र में जिले के सभी आईटीआई मिलकर 12.6 करोड़ रुपए छात्रों से वसूल रहे हैं। सिर्फ रिकॉर्ड के लिए उनका दाखिला ले रहे हैं। इसके बाद क्लास नदारद। संसाधन के अभाव में छात्र एडमिशन के बाद सीधे परीक्षा देने ही पहुंचते हैं। संस्थानों में न तो पढ़ाई होती है और न ही वर्कशॉप कराया जाता है। शहर में करीब 24 आईटीआई है। एक आईटीआई में औसतन 150 छात्र हैं। उनसे एक सत्र में 35,000 रुपए फीस के तौर पर लिया जाता है। 24 आईटीआई में करीब 3600 स्टूडेंट्स हैं। यानी सिर्फ एक आईटीआई एक वर्ष में 52,50,000 रुपए की कमाई कर रही है। मगर संसाधन के नाम पर जब इसकी पड़ताल की सच्चाई सामने आई।


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कुछ इस तरह से बेहाल है सबौर का प्रगति आईटीआई।

उपकरण पर पड़ी धूल की परत, कहीं क्लासरूम में दरवाजे भी नहीं

शहर से सटे प्रगति आईटीआई किसी अर्ध निर्मित गैरेज की तरह ही नजर आता है। लॉजनुमा छोटे कमरे में दरवाजा तक नहीं लगा है। दो कमरों में किसी तरह बेंच डेस्क लगाकर उसे क्लासरूम की शक्ल दी गई है। बुधवार को न तो कोई शिक्षक नजर आए और न ही छात्र। संचालक टिल्लु कुमार ने बताया कि छात्र दुर्गा पूजा की छुट्टी में घर गए हैं।

झुरखुरिया मोड़ के जयप्रणी आईटीआई में उपकरणों पर जमी धूल की परत।

24 प्राइवेट आईटीआई में करीब 3600 छात्र कर रहे हैं पढ़ाई

क्लासरूम से लेकर वर्कशॉप तक में जमी है धूल की मोटी परत

झुरखुरिया के जयप्राणी आईटीआई की हालत और भी खराब है। यहां संसाधन तो है, मगर उसका इस्तेमाल नहीं होता है। यहां एक सत्र में कुल 168 छात्रों का दाखिला लिया गया है। मगर यहां क्लासरूम से लेकर वर्कशॉप तक में जमी धूल की मोटी परत से साफ है कि यहां के छात्र इसका इस्तेमाल नहीं किया है। बुधवार को संस्था में एक भी छात्र नहीं मिले। प्राचार्य राजीव कुमार ने बताया कि क्लास सुबह 9.30 से शाम पांच बजे तक चलता है। रोज शाम चार से पांच एक्स्ट्रा कैरिक्यूलर एक्टिविटीज करवाई जाती है। छात्र वहां क्यों नहीं मौजूद हैं। इसका जवाब क्या दें ये उन्हें समझ नहीं आया। उन्होंने कभी कहा कि सब परीक्षा दे रहे हैं। फर्स्ट और सेकेंड सेमेस्टर की कौन सी परीक्षा हो रही है ये बात पूछने पर उन्होंने कहा कि परीक्षा नहीं हो रही। शिक्षक परीक्षा डयूटी में हैं।

By न्यूज़ डेस्क

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