राखी का त्यौहार हो. भाई पास हो और उनकी कलाई सुनी रहे. यह सुनने में जरा अटपटा सा लगता है. लेकिन, यह हकीकत है. जिले की रामपुर जलालपुर पंचायत के भाईयों की कलाई पिछले 200 सालों से सूनी ही रही है. यहां की बहनें डर से कहे या अंधविश्वास के कारण अपने भाई को राखी नहीं बांधती हैं.

रामपुर जलालपुर गांव की बहनें राखी के दिन मंदिरों में जाकर पूजा अर्चना करती है, लेकिन राखी का त्यौहार नहीं मनाती है. राखी बहन और भाई का त्यौहार होता है. इसमें बहन भाई के कलाई में राखी बांधकर रक्षा का वादा लेती हैं. वहीं, इस गांव की बहनें अपने भाई की कलाई सुनी रखकर उसके लम्बी उम्र की कामना करती हैं.

200 साल पहले बांधा था राखी

यहां के लोगों का कहना है कि 200 साल पहले यहां एक बहन ने भाई के हाथ में राखी बांधी थी. उसी दिन उसकी मौत हो गई थी. इसके बाद से आज तक इस गांव में रक्षाबंधन नहीं मनाया गया.

राखी के दिन भाई-बहन के चेहरे रहते है उदास

गांव की लड़कियों का कहना है कि सभी को देखकर हमें भी राखी बांधने की मन करता है, लेकिन डर एवं दहशत से हम भाई को राखी नहीं बांधते. भाई को राखी बांधे बिना ही उनके रक्षा की कामना करते है. उन्होंने कहा कि ऐसे राखी से क्या फायदा जब भाई को कुछ हो जाए. राखी के दिन इस गांव के भाई-बहन के चेहरे उदास रहते हैं. वहीं, गांव की बहुएं राखी का त्योहार मनाती हैं.

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By न्यूज़ डेस्क

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