पटना: बिहार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में होने जा रहे कैबिनेट विस्तार में अब सबकी नजर एक नाम पर टिक गई है—बुलो मंडल। EBC (अत्यंत पिछड़ा वर्ग) समीकरण को साधने के लिए जदयू इस बार उन्हें बड़ी जिम्मेदारी दे सकती है।


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🔴 क्यों चर्चा में हैं बुलो मंडल?

जदयू सूत्रों की मानें तो पार्टी इस बार कैबिनेट में EBC और पिछड़ा वर्ग का प्रतिनिधित्व बढ़ाने पर जोर दे रही है।
ऐसे में बुलो मंडल का नाम सबसे आगे चल रहा है, क्योंकि:

  • वे लंबे समय से जदयू के जमीनी और सक्रिय नेता माने जाते हैं
  • संगठन और चुनाव—दोनों में उनकी मजबूत पकड़ है
  • कोसी–सीमांचल इलाके में उनका प्रभाव अहम माना जाता है

🟢 जदयू की रणनीति में फिट बैठता नाम

पार्टी नेतृत्व, खासकर नीतीश कुमार के सामाजिक समीकरण में EBC की भूमिका हमेशा अहम रही है।

अब जब नेतृत्व में बदलाव के संकेत हैं और निशांत कुमार संगठन को मजबूत करने में लगे हैं, तब ऐसे नेताओं को आगे लाया जा रहा है जिनकी ग्राउंड पकड़ मजबूत हो

👉 बुलो मंडल इसी रणनीति में पूरी तरह फिट बैठते हैं।


🟠 क्या मिल सकता है बड़ा विभाग?

अगर बुलो मंडल कैबिनेट में शामिल होते हैं, तो उन्हें:

  • ग्रामीण विकास
  • सहकारिता
  • या पंचायती राज जैसे ग्रामीण और जनसंपर्क वाले विभाग मिल सकते हैं

इन विभागों के जरिए सरकार EBC वोट बैंक को सीधे साधने की कोशिश करेगी।


🔵 भाजपा-जदयू संतुलन में भी अहम भूमिका

जहां भाजपा अपने भूमिहार और सवर्ण समीकरण को साधने में लगी है, वहीं जदयू EBC और दलित पर फोकस कर रही है।

👉 ऐसे में बुलो मंडल की एंट्री:

  • NDA के भीतर सामाजिक संतुलन बनाएगी
  • और जदयू को अपने कोर वोट बैंक में मजबूती देगी

🟣 कैबिनेट विस्तार: कब होगा फैसला?

सूत्रों के मुताबिक:

  • 6 मई को कैबिनेट विस्तार संभव
  • कुल 32–33 मंत्री बन सकते हैं
  • जदयू कोटे से 5–6 नए चेहरों को मौका मिल सकता है

👉 इन नए चेहरों में बुलो मंडल का नाम सबसे मजबूत दावेदारों में माना जा रहा है।

By न्यूज़ डेस्क

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