नवगछिया लखनउ में कार्यरत सेना के हवलदार की मौत देर रात शव धोबिनिया आने की संभावना

लखनउ में कार्यरत सेना के हवलदार नवगछिया थाना क्षेत्र के धोबिनियां निवासी थल सेना के हवलदार गौरव कुमार की मौत लखनउ में तीन दिनपहले हो जाने के बाद उनका तिरंगे में लिपटा शव शुक्रवार को नवगछिया स्थित पैतृक गांव लाया गया. जैसे ही शव गांव पहुंचा तो लोग भारत माता की जय, जबतक सूरज चांद रहेगा गौरव तेरा नाम रहेगा के नारों से गूंज रहा था. अपने सेवा काल के दौरान मृत्यु को प्राप्त होने वाले गौरव की मौत से उनके परिजनों में भारी दुख था लेकिन लोग गौरव के बहादुरी और भलमानसता की चरचा करते आये. लोग यह भी कह रहे थे कि बड़े नसीब वालों को कफन के रुप में तिरंगा मिलता है. देर शाम हवलदार गौरव कुमार की शव यात्रा में शहर के कई लोग शामिल हुए. फिर गौरव के शव को उनके पूर्णिया के मोहनपुर स्थित गांव में ले जाया गया. गौरव के दोस्त और परिवार के लोग गौरव के देश सेवा कीभावना की तारीफ करते नहीं थक रहे थे. मालूम हो कि कि मंगलवार को ड्यूटी केबाद देर रात वे सो गये. सुबह जानकारी मिली थी गौरव की मौत हो गयी है. जवान के घर में सबों का रो रो कर बुरा हाल है. मालूम हो कि महज तीन माहपहले गौरव की शादी हुई थी. वह घर से गत रविवार को ही ड्यूटी पर नवगछिया अवध असम एक्सप्रेस से निकला लखनउ के लिए रवाना हुआ था. जानकारी मिली है कि वर्ष 2008 में गौरव ने आर्मी ज्वाईन किया था. तीन माह पहले र्पू.िाया के रुपौली जिले के रविंद्र सिंह की पुत्री जूली देवी के साथ उसके शादी हुई थी. अपनी पत्नी को गौरव ने कुछ दिन पहले ही मायके से धोबिनिया लायाथा. फिलहाल वह घर पर ही रह रही है. गौरव की मौत की सूचना मिलते ही जूली देवी दहाड़ मार कर रो रही है. उसने पिछले तीन दिनों से कुछ नहीं खाया है.वह बार बार वेहोश हो रही है. गौरव के माता और पिता भाई दोस्त सभी इस घटना से गहरे सदमे में हैं. मालूम हो कि गौरव धोबिनिया गांव के सिकंदर यादव का दूसरे नंबर का पुत्र था. गौरव पांच भाई था. गौरव का पूरा परिवार खेती गृहस्थी करता है. गौरव के चले जाने के बाद परिवार गहरे सदमे में है.


