नवगछिया| शिवशक्ति योगपीठ नवगछिया के पीठाधीश्वर स्वामी आगमानंद ने गुरुओं को सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि बच्चों को जो शिक्षा मिलनी चाहिए वह आज नहीं दी जा रही है। रोजगार प्राप्त करने के लिए बच्चों को पढ़ाया जाता है। नैतिक और राष्ट्रभक्ति के साथ-साथ आध्यात्मिक शिक्षा की भी जरूरत है। शिक्षकों का भी पहला उद्देश्य होना चाहिए कि विद्यार्थियों को हर प्रकार से योग्य बनाएं।
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इस दौरान स्वामी आगमानंद ने प्राथमिक से लेकर स्नातकोत्तर तक शिक्षा ग्रहण कराने वाले दर्जनभर शिक्षकों की पूजा की और अंगवस्त्र सम्मानित किया। प्रो. बहादुर मिश्र रचित पुस्तक चिंतन की मुद्राएं का लोकार्पण भी किया गया।
बहादुर मिश्र ने कहा कि मेरे अलावा सभी शिक्षकों ने रामू को मात्र 25% ही शिक्षा दिया। वे आध्यात्मिक शक्ति से आज रामू से स्वामी आगमानंद बन गए हैं। आचार्य ब्रजमोहन सिंह ने कहा कि आगमानंद ने सिद्धि से सभी गुरुओं को धन्य कर दिया। तृप्ति पांडे व राजकुमार ने अपनी कविता सुनाई।

