नवगछिया : बिसुआ पर्व इस वर्ष 14 अप्रैल, मंगलवार को श्रद्धा और पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया जाएगा। यह पर्व चैत्र माह के अंतिम दिन और वैशाख माह के प्रथम दिन मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण लोकपर्व है। बिहार और झारखंड में इसे रबी फसल की कटाई और नए कृषि वर्ष के आगमन का प्रतीक माना जाता है।

पर्व को लेकर लोगों में विशेष उत्साह देखा जा रहा है। इस दिन परंपरा के अनुसार लोग नए अन्न से बने सत्तू का सेवन करते हैं और परिवार के सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

माँ काली मंदिर के पंडित रामजी ने बताया कि सूर्य देव 13 अप्रैल, सोमवार को दोपहर 12:06 बजे मेष राशि में प्रवेश करेंगे। इसी कारण 14 अप्रैल को बिसुआ पर्व मनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि सूर्य के मेष राशि में प्रवेश करते ही खरमास की समाप्ति हो जाएगी और इसके साथ ही विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश सहित अन्य शुभ कार्यों की शुरुआत हो जाएगी।

पंडित रामजी के अनुसार, बिसुआ पर्व के दिन लोग अपने-अपने कुलदेवताओं की पूजा-अर्चना करते हैं। इस अवसर पर सत्तू, कच्चा आम (टिकोला) और शीतल जल अर्पित करने की परंपरा है। मान्यता है कि ऐसा करने से परिवार में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है।

उन्होंने यह भी बताया कि वैशाख मास को मधुमास भी कहा जाता है, जिसका धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से विशेष महत्व है।

📲 Naugachia News WhatsApp Group Join करें
Join Now →

By न्यूज़ डेस्क

न्यूज़ को शेयर करे और कमेंट कर अपनी राय दे.....