नवगछिया अनुमंडल अस्पताल में गुरुवार को स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर लापरवाही सामने आई, जिसने मरीजों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। सामान्य कमजोरी और शरीर दर्द की शिकायत लेकर पहुंची एक महिला को ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर ने कुत्ते के काटने पर दिया जाने वाला रेबीज इंजेक्शन लिख दिया।
मामला नगरह की रहने वाली किरण देवी से जुड़ा है, जो ओपीडी में इलाज कराने पहुंची थीं। उन्होंने ड्यूटी पर मौजूद डॉ. रवि को अपनी समस्या बताई, लेकिन आरोप है कि डॉक्टर ने बिना समुचित जांच किए सीधे पर्चे पर रेबीज (एआरवी) इंजेक्शन लिख दिया। इतना ही नहीं, दवा काउंटर और इमरजेंसी वार्ड के स्टाफ ने भी महिला को वही इंजेक्शन लेने की सलाह दी।
जब महिला को इस पर संदेह हुआ, तो वह दोबारा डॉक्टर के पास पहुंचीं और आपत्ति जताई। आरोप है कि डॉक्टर ने अपनी गलती स्वीकार करने के बजाय लापरवाही भरा जवाब दिया। इससे नाराज होकर महिला अस्पताल गेट पर ही धरने पर बैठ गईं।

घटना की सूचना मिलने पर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. पिंकेश कुमार मौके पर पहुंचे और उचित कार्रवाई का भरोसा दिया। इसके बाद करीब दो घंटे चले धरने के बाद महिला शांत हुईं।
इस घटना पर आजाद हिंद मोर्चा के अध्यक्ष राजेंद्र यादव ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह मरीजों की सुरक्षा के साथ गंभीर खिलवाड़ है और इसकी शिकायत सिविल सर्जन से की जाएगी।
वहीं, जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. हेमशंकर शर्मा ने बताया कि रेबीज का इंजेक्शन (एआरवी) केवल तब दिया जाता है जब किसी संक्रमित जानवर के काटने या खरोंचने की पुष्टि हो। बिना आवश्यकता के यह इंजेक्शन लगवाना सही नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि दुर्लभ मामलों में इसके साइड इफेक्ट के रूप में पैरालिसिस भी हो सकता है, जबकि रेबीज संक्रमण होने पर मृत्यु लगभग निश्चित होती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बिना क्लीनिकल हिस्ट्री लिए जल्दबाजी में दवा लिखना मरीजों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। फिलहाल, इस पूरे मामले ने अस्पताल की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

