नवगछिया: अनुमंडल के इस्माईलपुर-बिंदटोली तटबंध पर अतिक्रमण, मिट्टी के अवैध कटान, झाड़ियों के फैलाव तथा मक्के के डंठल और भूसा जमा किए जाने से तटबंध की सुरक्षा पर गंभीर खतरा मंडराने लगा है। गंगा नदी के लगातार बढ़ते जलस्तर के बीच स्थानीय लोगों ने आशंका जताई है कि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो वर्ष 2021 जैसी स्थिति दोबारा उत्पन्न हो सकती है।
Total Downloads: 93
2021 की तबाही की यादें फिर हुईं ताजा
ग्रामीणों का कहना है कि वर्ष 2021 में तटबंध पर रखे मक्के के डंठलों में चूहों ने बड़े-बड़े बिल बना दिए थे। इसके कारण गंगा के बढ़ते दबाव में तटबंध क्षतिग्रस्त हो गया था, जिससे इलाके में भारी तबाही हुई थी। इसी अनुभव को देखते हुए लोग इस बार भी समय रहते अतिक्रमण हटाने की मांग कर रहे हैं।
स्पर संख्या-1 से 3 के बीच कई जगह अतिक्रमण
स्थानीय लोगों के अनुसार तटबंध के स्पर संख्या-1, 2 और 3 के बीच कई स्थानों पर मिट्टी का कटाव, झाड़ियों का फैलाव और अस्थायी अतिक्रमण देखा जा रहा है। इसके चलते जल संसाधन विभाग के अभियंताओं को नियमित निरीक्षण और पेट्रोलिंग में भी कठिनाई हो रही है।

करोड़ों की बाढ़ सुरक्षा योजनाओं पर खतरे की आशंका
गंगा के कटाव से तटबंध की सुरक्षा के लिए जल संसाधन विभाग द्वारा करोड़ों रुपये खर्च कर सीट पाइलिंग, बोल्डर एप्रन और जियो बैग पिचिंग जैसे बाढ़ निरोधी कार्य कराए गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि तटबंध से मक्के के डंठल, भूसा और अवैध कब्जे नहीं हटाए गए तो ये सभी सुरक्षा कार्य प्रभावित हो सकते हैं और बाढ़ के दौरान स्थिति गंभीर हो सकती है।
प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग से तटबंध का तत्काल निरीक्षण कर अतिक्रमणकारियों की पहचान करने तथा अवैध कब्जा हटाने की मांग की है। उनका कहना है कि विभागीय निगरानी के बावजूद तटबंध पर लगातार अतिक्रमण होना चिंता का विषय है।
दोबारा भेजा जाएगा स्मारपत्र
बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, नवगछिया के कार्यपालक अभियंता गौतम कुमार ने बताया कि तटबंध को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए स्थानीय नागरिक प्रशासन और पुलिस प्रशासन को पुनः स्मारपत्र भेजा जाएगा। उन्होंने कहा कि समय रहते कार्रवाई कर तटबंध की सुरक्षा सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा।
