नवगछिया। लोक आस्था और वर्षों पुरानी परंपरा के तहत सोमवार, 17 अगस्त को सती बिहुला अपने मायके नवगछिया पहुंचीं। उनके आगमन पर विभिन्न पूजा स्थलों पर श्रद्धालुओं ने पूरे श्रद्धा भाव से पूजा-अर्चना कर स्वागत किया। सुबह से ही पूजा स्थलों पर महिलाओं और श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी थी।
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बिहुला चौक पर पांच बहनों के साथ विराजमान हुईं सती बिहुला
पोस्टऑफिस के पीछे वाली गली स्थित बिहुला चौक पर सती बिहुला को भगवान शंकर की मानस पुत्री माता विषहरी की पांच बहनों के साथ सिंहासन पर विराजमान कराया गया। इसके बाद वैदिक विधि-विधान से पूजा-अर्चना शुरू हुई।
महिलाओं ने सुबह से ही पूजा स्थल पर डलिया चढ़ाकर माता की आराधना की और परिवार की सुख-समृद्धि तथा खुशहाली की कामना की।

पुरानी सब्जी पट्टी, मुसहरी पट्टी और मक्खातकिया में भी पूजा
नवगछिया बाजार की पुरानी सब्जी पट्टी स्थित मंदिर में देर शाम माता की प्रतिमा स्थापित कर पूजा-अर्चना शुरू की गई। इसके अलावा मुसहरी पट्टी और मक्खातकिया में भी माता की प्रतिमाएं स्थापित की गईं। सभी पूजा स्थलों पर श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से माता की आराधना की।
मान्यता है—मायके लौटती हैं सती बिहुला
कुणाल गुप्ता ने बताया कि उजानी गांव को सती बिहुला का मायका माना जाता है। वर्षों से चली आ रही मान्यता के अनुसार 17 अगस्त को सती बिहुला अपने मायके नवगछिया पहुंचती हैं। इसी परंपरा के तहत श्रद्धालु उनका स्वागत उसी श्रद्धा और सम्मान के साथ करते हैं, जैसे ससुराल से बेटी के मायके लौटने पर किया जाता है।
18 अगस्त को निकलेगी विसर्जन यात्रा
पूजा समारोह के आयोजनकर्ता मुकेश राणा ने बताया कि 18 अगस्त की शाम विसर्जन यात्रा निकाली जाएगी। इसके साथ ही इस वर्ष के पूजा समारोह का समापन होगा।
शाहपुर में नागपंचमी महोत्सव का भव्य आगाज
इधर, नारायणपुर प्रखंड के शाहपुर गांव के वार्ड संख्या 6 में सोमवार को दो दिवसीय नागपंचमी महोत्सव का शुभारंभ हुआ। महोत्सव की शुरुआत 201 महिलाओं और कन्याओं की कलश शोभायात्रा से हुई।
शोभायात्रा शाहपुर गांव से निकलकर मधुरापुर और बलहा बाजार होते हुए मधुरापुर जहाज घाट स्थित गंगा नदी घाट पहुंची। यहां वैदिक मंत्रोच्चार के बीच महिलाओं और कन्याओं ने गंगा जल कलश में भरा।
इसके बाद श्रद्धालु नगर भ्रमण करते हुए पुनः भगवती स्थान पहुंचे। शोभायात्रा के दौरान बाजे-गाजे, ढोल-नगाड़ों और माता के जयकारों से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो गया। रास्ते में शोभायात्रा को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़े।
13 वर्षों से हो रही प्रतिमा स्थापना
मेला अध्यक्ष शंकर मंडल ने बताया कि नागपंचमी महोत्सव धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक एकता का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि शाहपुर में पिछले 13 वर्षों से नागपंचमी के अवसर पर प्रतिमा स्थापित की जा रही है।
उन्होंने क्षेत्र के लोगों से महोत्सव में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर आयोजन को सफल बनाने की अपील की।
