भागलपुर। विक्रमशिला सेतु पर बने बेली ब्रिज से बुधवार आधी रात से वाहनों का परिचालन पूरी तरह बंद हो गया है। इसके साथ ही भागलपुर और नवगछिया के बीच सड़क संपर्क प्रभावित होने के कारण अगले करीब तीन महीने तक गंगा जलमार्ग वैकल्पिक लाइफलाइन के रूप में काम करेगा। यात्रियों की सुविधा के लिए प्रशासन ने बड़े जलयानों की व्यवस्था की है।
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1 अक्टूबर की सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक मुफ्त फेरी सेवा संचालित की जाएगी। इस सेवा से यात्री अपने सामान के साथ साइकिल और बाइक भी बिना किसी शुल्क के गंगा पार कर सकेंगे। सुरक्षा कारणों से सामान्य देशी नावों के परिचालन पर रोक रहेगी।
बियाडा और बाबूपुर से मिलेगी जलमार्ग सेवा
भागलपुर की ओर बियाडा घाट और बाबूपुर घाट से जलमार्ग की व्यवस्था की गई है, जबकि नवगछिया की ओर जाह्नवी गंगा घाट मुख्य कनेक्शन रहेगा। प्रशासन ने यात्रियों के प्रवेश और निकास के लिए अलग-अलग व्यवस्था की है, ताकि बेली ब्रिज बंद होने के बाद अचानक बढ़ने वाली भीड़ के कारण अव्यवस्था या भगदड़ की स्थिति उत्पन्न न हो।

बेली ब्रिज बंद होने से पहले जिलाधिकारी डॉ. अलंकृता पांडे, वरीय पुलिस अधीक्षक प्रमोद कुमार यादव और नगर पुलिस अधीक्षक समेत अन्य अधिकारियों ने विभिन्न घाटों का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने यात्रियों की सुरक्षा और सुगम आवागमन को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया।
बियाडा घाट पर विशेष तैयारी
शहर के नजदीक स्थित बियाडा घाट पर सबसे अधिक यात्रियों के पहुंचने की संभावना है। इसे देखते हुए घाट का समतलीकरण कराया गया है। यात्रियों के लिए वाटरप्रूफ टेंट लगाए गए हैं। इसके अलावा हाई-मास्ट लाइट और बैरिकेडिंग की व्यवस्था की गई है।
प्रशासन का प्रयास है कि यात्रियों को घाट पर किसी तरह की परेशानी न हो और जलयान तक पहुंचने तथा उतरने के दौरान भीड़ को नियंत्रित रखा जा सके।
बरारी घाट से क्यों नहीं चलेगी फेरी?
बरारी घाट से फेरी सेवा नहीं चलाने का निर्णय लिया गया है। जिलाधिकारी डॉ. अलंकृता पांडे के अनुसार, बरारी घाट पर स्थायी इंस्टॉलेशन का काम होना है। इसके लिए वहां क्रेन और भारी मशीनरी तैनात रहेगी।
ऐसे में यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए बरारी घाट के बजाय बियाडा घाट से फेरी सेवा संचालित करने का निर्णय लिया गया है।
बाबूपुर में तीन बड़े जहाज तैयार
बाबूपुर गंगा घाट पर भी यात्रियों के लिए व्यापक तैयारी की गई है। घाट तक पहुंचने के लिए ग्रामीण पथ से एप्रोच रोड तैयार की गई है। यात्रियों के बैठने के लिए वाटरप्रूफ टेंट लगाए गए हैं। घाट पर तीन बड़े जलयान तैयार रखे गए हैं।
इन जलयानों से यात्री, सामान और दोपहिया वाहन नदी के दूसरे छोर तक पहुंच सकेंगे।
हालांकि बाबूपुर घाट तक पहुंचने वाली सड़क प्रशासन के लिए चुनौती बनी हुई है। एनएच-80 को घाट से जोड़ने वाली ग्रामीण सड़क के दोनों किनारों पर अतिक्रमण है। वाहनों के चढ़ने-उतरने के दौरान जाम की स्थिति नहीं बने, इसके लिए प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने और सड़क को निर्बाध रखने का निर्देश दिया है।
बड़े वाहन और मालवाहक गाड़ियों के लिए अलग व्यवस्था
यात्री फेरी और मालवाहक वाहनों की व्यवस्था अलग-अलग रखी गई है। बाबूपुर घाट से कार्गो मूवमेंट कराया जाएगा। बड़े और मालवाहक वाहनों को कार्गो जहाज के माध्यम से गंगा पार कराया जाएगा।
इस व्यवस्था का उद्देश्य आवश्यक सामान की आपूर्ति को प्रभावित होने से बचाना और यात्री फेरी पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ने देना है।
हर जहाज पर मजिस्ट्रेट और पुलिस बल
जलमार्ग से यात्रियों की आवाजाही के दौरान सुरक्षा के लिए प्रत्येक जहाज पर मजिस्ट्रेट और पुलिस बल की तैनाती रहेगी। इसके साथ ही आपदा मित्र भी मौजूद रहेंगे।
किसी यात्री की तबीयत बिगड़ने की स्थिति में तत्काल उपचार के लिए मेडिकल कैंप की व्यवस्था की गई है। घाटों पर भी पर्याप्त पुलिस बल तैनात रहेगा।
पुलिस की जिम्मेदारी केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं रहेगी। पुलिसकर्मी भीड़ नियंत्रण, कतार व्यवस्था और वाहनों के आवागमन को भी व्यवस्थित करेंगे।
घाट पर मिलेगी ‘दीदी की रसोई’ की सुविधा
यात्रियों को लंबे इंतजार या यात्रा के दौरान भोजन-पानी की परेशानी न हो, इसके लिए घाटों पर ‘दीदी की रसोई’ की व्यवस्था की गई है। यहां यात्रियों को भोजन उपलब्ध कराया जाएगा।
यात्रियों की शिकायत, सुझाव और आपात स्थिति के लिए जिला आपातकालीन नियंत्रण कक्ष भी सक्रिय रहेगा। इसका नंबर जल्द सार्वजनिक किए जाने की बात कही गई है। नियंत्रण कक्ष 24 घंटे यात्रियों की सहायता के लिए उपलब्ध रहेगा।
प्रशासन की अपील
जिलाधिकारी ने लोगों से अपील की है कि बेली ब्रिज बंद रहने के दौरान जलमार्ग पर अनावश्यक भीड़ बढ़ाने से बचें। अति आवश्यक होने पर ही फेरी सेवा का उपयोग करें।
प्रशासन का कहना है कि अगले करीब तीन महीने के दौरान भागलपुर-नवगछिया के बीच जलमार्ग को व्यवस्थित और सुरक्षित बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक इंतजाम किए गए हैं।
नोट: आपके दिए स्रोत में एक जगह “1 अक्टूबर से” और शुरुआत में “बुधवार आधी रात” का संदर्भ है। प्रकाशन से पहले तारीख/वार को एक बार आधिकारिक आदेश से मिलान कर लेना बेहतर रहेगा।
