नवगछिया। पचगछिया बाजार स्थित दुर्गा मंदिर क्षेत्र के श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास का प्रमुख केंद्र है। वर्ष 1978 में गांव के हाहू साह द्वारा मां दुर्गा की प्राण-प्रतिष्ठा कराए जाने के बाद से यहां नियमित पूजा-अर्चना की परंपरा चली आ रही है। कभी संतोषी मां के नाम से प्रसिद्ध इस मंदिर में नवरात्र के दौरान विशेष चहल-पहल रहती है। संध्या आरती में आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं और मां दुर्गा के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
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नवगछिया से मकंदपुर चौक होते हुए तिनटंगा करारी जाने वाली मुख्य सड़क के समीप स्थित यह मंदिर स्थानीय लोगों की धार्मिक भावनाओं से गहराई से जुड़ा है। आसपास के क्षेत्र में प्रमुख दुर्गा मंदिर नहीं होने के कारण यहां प्रतिदिन श्रद्धालुओं की भीड़ जुटती है। मंदिर में मां दुर्गा की प्रतिमा बंगाल के कारीगरों द्वारा तैयार की जाती है। नवरात्र और मेले के अवसर पर मंदिर परिसर में विशेष रौनक देखने को मिलती है। दूर-दराज के गांवों से भी लोग पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं।
गंगा की धारा से जुड़ी है मंदिर की मान्यता

पचगछिया दुर्गा मंदिर से जुड़ी गंगा की धारा की एक प्रचलित मान्यता भी क्षेत्र में चर्चित है। स्थानीय लोगों के अनुसार, गंगा की धारा मंदिर के समीप आकर ठहर गई थी। मंदिर के आगे के इलाके को गंगा प्रसाद धार के नाम से जाना जाता है।
ग्रामीणों के मुताबिक, करीब दो वर्ष पहले गंगा का तेज बहाव मंदिर के मुख्य द्वार तक पहुंच गया था, लेकिन बाद में पानी लौट गया। इस घटना की चर्चा आसपास के इलाकों में लंबे समय तक होती रही। स्थानीय श्रद्धालु इसे मंदिर से जुड़ी विशेष घटना के रूप में याद करते हैं।
दुर्गा सप्तशती पाठ, संध्या आरती और जागरण से भक्तिमय रहता है माहौल
मंदिर में प्रतिदिन दुर्गा सप्तशती का पाठ और संध्या आरती आयोजित की जाती है। रात में चंदन कुमार के नेतृत्व में जागरण का आयोजन होता है। भक्ति गीतों और मां की आराधना से मंदिर परिसर का वातावरण भक्तिमय बना रहता है।
श्रद्धालु अर्जुन साह का कहना है कि मां के दरबार में सच्चे मन से प्रार्थना करने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। यही विश्वास मंदिर के प्रति लोगों की आस्था को लगातार मजबूत कर रहा है।
पचगछिया दुर्गा मंदिर आज भी धार्मिक परंपरा, सामूहिक आस्था और ग्रामीण संस्कृति का महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ है। नवरात्र के दौरान यहां जुटने वाली श्रद्धालुओं की भीड़ इस मंदिर की स्थानीय महत्ता को दर्शाती है।
