बलहा आदर्श मध्य विद्यालय में कमरों की कमी, 1318 से अधिक छात्र-छात्राओं की पढ़ाई दो शिफ्ट में; जमीन दान के बावजूद भवन निर्माण अटका
नवगछिया। नारायणपुर प्रखंड के आदर्श मध्य विद्यालय बलहा में कमरों की कमी के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। विद्यालय में कक्षा 1 से 12 तक की पढ़ाई के लिए महज नौ कमरे उपलब्ध हैं, जबकि यहां 1300 से अधिक छात्र-छात्राएं नामांकित हैं। ऐसे में स्कूल प्रशासन को दो शिफ्ट में कक्षाएं संचालित करनी पड़ रही हैं। ग्रामीणों की ओर से हाईस्कूल भवन निर्माण के लिए जमीन दान दिए जाने के बावजूद भवन निर्माण का काम अब तक शुरू नहीं हो सका है।
विद्यालय में कक्षा 1 से 8 तक 768 विद्यार्थी और कक्षा 9 से 12 तक करीब 550 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं। विद्यार्थियों की इतनी बड़ी संख्या के अनुपात में कमरों की कमी के कारण स्कूल प्रशासन के सामने पढ़ाई सुचारू रूप से संचालित करने की चुनौती बनी हुई है।
सुबह से शाम तक दो शिफ्ट में चलती हैं कक्षाएं
विद्यालय के प्रधानाध्यापक विनोद मंडल ने बताया कि कक्षा 1 से 8 तक की पढ़ाई सुबह 7 बजे से दोपहर 12 बजे तक होती है। वहीं, कक्षा 9 से 12 तक की कक्षाएं दोपहर 12 बजे से शाम 5 बजे तक संचालित की जाती हैं।

उन्होंने बताया कि विद्यालय में कमरों की कमी के कारण सभी कक्षाओं का संचालन एक साथ करना संभव नहीं है। इसके अलावा मध्यान्ह भोजन की व्यवस्था के कारण पढ़ाई की एक घंटी भी प्रभावित होती है। इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई पर अतिरिक्त असर पड़ रहा है।
जमीन दान में मिली, लेकिन पेड़ों के कारण भवन निर्माण अटका
विद्यालय में हाईस्कूल भवन निर्माण के लिए गांव के लोगों ने जमीन दान में दी है। इसके बावजूद अब तक भवन निर्माण की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी है। बताया गया कि मनरेगा योजना के तहत दान में मिली जमीन पर पेड़ लगाए गए हैं। इन पेड़ों के निपटारे की प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण भवन निर्माण का काम अटका हुआ है।
हाईस्कूल के प्रधानाध्यापक तपन कुमार ने बताया कि जमीन पर लगे पेड़ों की कीमत चुकाने के बाद ही भवन निर्माण संभव हो सकेगा। इस प्रक्रिया के लंबित रहने से विद्यालय को अतिरिक्त भवन नहीं मिल पाया है।
विभागीय पहल का इंतजार, विद्यार्थियों को मिलेगी राहत
भास्कर संवाददाता कौशल किशोर मिश्रा की पड़ताल में विद्यालय की यह स्थिति सामने आई है। कमरों की कमी और दो शिफ्ट में पढ़ाई के कारण विद्यार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
अब संबंधित विभाग की पहल का इंतजार है, ताकि जमीन पर लगे पेड़ों के निपटारे की प्रक्रिया पूरी कर भवन निर्माण शुरू कराया जा सके। अतिरिक्त भवन बनने से विद्यार्थियों को पर्याप्त कक्षाएं मिल सकेंगी और विद्यालय में पढ़ाई की व्यवस्था बेहतर हो सकेगी।
