गंगा में गाद की समस्या पर संजय झा का बड़ा बयान, केंद्र से राष्ट्रीय सिल्ट पॉलिसी बनाने की मांग; फरक्का संधि नवीनीकरण का किया विरोध
नवगछिया। गंगा नदी में लगातार जमा हो रही गाद और बालू के कारण बढ़ते बाढ़ एवं कटाव के संकट को लेकर जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद संजय झा ने केंद्र सरकार से अविलंब प्रभावी राष्ट्रीय सिल्ट पॉलिसी बनाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि गंगा में जमा गाद और नदी के बीच बने बड़े-बड़े बालू के टीलों (शोल) को वैज्ञानिक तरीके से हटाना जरूरी है। इससे नदी का मूल जलप्रवाह सुचारू हो सकेगा और तटवर्ती इलाकों में हर साल आने वाली बाढ़ तथा कटाव के संकट को कम करने में मदद मिलेगी।
संजय झा मंगलवार को भागलपुर जिले के नवगछिया अनुमंडल अंतर्गत काजीकोरैया-राघोपुर जमींदारी बांध के स्थलीय निरीक्षण के दौरान पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। इस दौरान बिहार सरकार के ऊर्जा मंत्री शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल और जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा भी उनके साथ मौजूद थे।
बक्सर से भागलपुर तक गंगा में गाद का संकट, जलप्रवाह हो रहा बाधित
संजय झा ने कहा कि गंगा में सिल्ट जमाव की समस्या केवल भागलपुर तक सीमित नहीं है। फरक्का बैराज के बैकवाटर प्रभाव के कारण भागलपुर से लेकर पटना और बक्सर तक गंगा के ऊपरी हिस्सों में भारी मात्रा में गाद जमा हो रही है। नदी के बीचों-बीच कई स्थानों पर विशाल शोल बन गए हैं, जिससे गंगा की जलधारण क्षमता प्रभावित हो रही है और पानी का बहाव किनारों की ओर बढ़ रहा है।

उन्होंने कहा कि गंगा में जमा गाद और शोल को वैज्ञानिक एवं योजनाबद्ध तरीके से हटाने की जरूरत है। इससे नदी का मुख्य जलप्रवाह बीच धारा में सुचारू हो सकेगा और तटवर्ती इलाकों पर कटाव का दबाव कम किया जा सकेगा।
संजय झा ने जोर देते हुए कहा कि गंगा की समस्या का स्थायी समाधान निकालने के लिए केंद्र सरकार को राष्ट्रीय स्तर पर ठोस नीति बनानी चाहिए। इसके तहत गाद प्रबंधन, नदी की गहराई बनाए रखने और जलप्रवाह को व्यवस्थित करने के लिए दीर्घकालिक योजना तैयार की जानी चाहिए।
फरक्का संधि के नवीनीकरण पर संजय झा का कड़ा रुख
फरक्का जलसंधि के मुद्दे पर संजय झा ने स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा कि संधि का नवीनीकरण नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि केंद्र सरकार इस दिशा में कोई पहल करती है, तो किसी भी औपचारिक बातचीत से पहले बिहार के हिस्से के पानी का स्पष्ट और न्यायसंगत निर्धारण होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि गंगा के प्राकृतिक प्रवाह को बनाए रखने, गाद की समस्या दूर करने और बिहार को बाढ़ एवं कटाव से राहत दिलाने के लिए राज्य के हितों को सर्वोपरि रखना जरूरी है। बिहार के हिस्से के पानी को लेकर स्पष्ट व्यवस्था होने के बाद ही इस दिशा में आगे की बातचीत होनी चाहिए।
तकनीकी अध्ययन और शीट पाइलिंग तकनीक अपनाने पर जोर
जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष ने कहा कि गंगा की प्राकृतिक गहराई को बहाल रखने के लिए समयबद्ध और वैज्ञानिक गाद प्रबंधन की जरूरत है। इसके लिए जल संसाधन विशेषज्ञों से तकनीकी अध्ययन कराया जाना चाहिए। अध्ययन के आधार पर नदी में जमा गाद को हटाने की प्रभावी व्यवस्था की जाए।
उन्होंने तटबंधों को कटाव से बचाने के लिए शीट पाइलिंग जैसी आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकों के इस्तेमाल पर भी जोर दिया। उनका कहना था कि वैज्ञानिक उपायों और आधुनिक तकनीक के समन्वय से गंगा किनारे बसे गांवों को कटाव से बचाने में मदद मिल सकती है।
काजीकोरैया-राघोपुर जमींदारी बांध का किया निरीक्षण
इससे पहले संजय झा ने ऊर्जा मंत्री शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल और जदयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा के साथ काजीकोरैया-राघोपुर जमींदारी बांध का गहन निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने जल संसाधन विभाग के अभियंताओं से बाढ़ पूर्व तैयारियों, तटबंधों की सुरक्षा और गंगा में कटाव की वर्तमान स्थिति की जानकारी ली।
निरीक्षण के दौरान विभागीय अधिकारियों से सुरक्षात्मक कार्यों की प्रगति और संवेदनशील स्थानों की स्थिति के बारे में भी जानकारी ली गई। मौके पर विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा जिला एवं प्रदेश स्तर के जदयू पदाधिकारी और स्थानीय जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
गंगा में लगातार बढ़ते गाद जमाव और कटाव की समस्या के बीच संजय झा का यह निरीक्षण क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि गाद प्रबंधन और तटबंधों की सुरक्षा को लेकर ठोस पहल की जाएगी।
