बिहार में गुलाबी ठंड की दस्तक, 4 से 8 नवंबर तक कैसा रहेगा मौसम? किसानों के लिए BAU सबौर की बड़ी सलाह
हल्के बादलों के बीच शुष्क रहेगा मौसम, रबी मक्का, मसूर और सरसों की बुआई के लिए अनुकूल समय; सब्जी उत्पादकों और पशुपालकों को भी दी गई जरूरी सलाह
नवगछिया। अक्टूबर के अंतिम दिनों और नवंबर की शुरुआत के साथ ही बिहार में मौसम का मिजाज तेजी से बदलने लगा है। सुबह और शाम के समय हवा में हल्की सिहरन महसूस होने लगी है। मौसम में यह बदलाव गुलाबी ठंड की दस्तक का संकेत दे रहा है। इस बीच बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), सबौर की ओर से जारी कृषि मौसम सलाह किसानों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
विश्वविद्यालय की ग्रामीण कृषि मौसम सेवा के अनुसार, 4 से 8 नवंबर के बीच राज्य के मौसम में हल्का बदलाव देखने को मिलेगा। आसमान में हल्के बादलों की आवाजाही बनी रहेगी, लेकिन मौसम शुष्क रहने का अनुमान है। हाल के दिनों में हुई छिटपुट बारिश से खेतों में बनी नमी रबी फसलों की बुआई के लिए अनुकूल मानी जा रही है।

हल्के बादल और ठंडी पूरबा हवा, जानिए कैसा रहेगा तापमान
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, 4 से 8 नवंबर तक दक्षिण बिहार के विभिन्न जिलों में आसमान में हल्के बादल छाए रह सकते हैं। हालांकि, इस दौरान बारिश की संभावना नहीं है और मौसम मुख्य रूप से शुष्क बना रहेगा।
दिन के समय धूप निकलने से अधिकतम तापमान 29 से 30 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है। वहीं, रात के तापमान में गिरावट आने से न्यूनतम तापमान 20 से 21 डिग्री सेल्सियस तक रह सकता है।
इस दौरान 5 से 6 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पूरबा हवाएं चलने की संभावना है। इससे सुबह और देर रात हल्की ठंड महसूस हो सकती है। मौसम का यह मिजाज खेती-किसानी के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है।
रबी मक्का, मसूर और सरसों की बुआई के लिए अनुकूल समय
हाल के दिनों में हुई छिटपुट बारिश से खेतों में पर्याप्त नमी बनी हुई है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, यह स्थिति रबी फसलों की बुआई के लिए अनुकूल है। किसानों को सलाह दी गई है कि जिन खेतों में अधिक बारिश के कारण पानी जमा हो गया है, वहां पहले जल निकासी की व्यवस्था करें।
मिट्टी में बुआई योग्य नमी होने पर किसान खेतों की तैयारी शुरू कर सकते हैं। इस समय रबी मक्का, मसूर और सरसों की बुआई करना लाभकारी हो सकता है।
वैज्ञानिकों ने किसानों को अनुशंसित किस्मों के प्रमाणित बीजों का चयन करने और बुआई से पहले बीजोपचार करने की सलाह दी है। इससे फसलों को शुरुआती अवस्था में बीमारियों से बचाने में मदद मिल सकती है।
सब्जी उत्पादकों के लिए भी जरूरी सलाह
बदलते मौसम में सब्जी उत्पादकों के लिए भी बुआई और फसलों की देखभाल का महत्वपूर्ण समय है। बीएयू सबौर की ग्रामीण कृषि मौसम सेवा ने पत्तागोभी की बुआई जल्द पूरी करने की सलाह दी है।
इसके साथ ही गाजर और पालक की बुआई शुरू करने के लिए भी यह समय अनुकूल बताया गया है। समय पर बुआई करने से फसलों की अच्छी बढ़वार और बेहतर उत्पादन की संभावना रहती है।
किसानों को खेतों में नमी की स्थिति के अनुसार सिंचाई करने तथा फसलों की नियमित निगरानी करने की सलाह दी गई है। इससे अनावश्यक लागत को कम करने और उत्पादन की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
गुलाबी ठंड में पशुओं की देखभाल भी जरूरी
मौसम में बदलाव का असर पशुओं के स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है। रात के तापमान में गिरावट को देखते हुए पशुपालकों को मवेशियों की विशेष देखभाल करने की सलाह दी गई है।
पशुओं को साफ, सूखी और हवादार जगह पर रखना चाहिए। शाम और रात के समय ठंडी हवा से बचाव के लिए पशुशाला में उचित व्यवस्था करें। पशुओं के बैठने के स्थान पर सूखे पुआल का बिछावन देना भी उपयोगी हो सकता है।
इसके अलावा पशुओं को संतुलित आहार और पर्याप्त मात्रा में स्वच्छ पानी उपलब्ध कराना जरूरी है। पशुओं के व्यवहार या स्वास्थ्य में असामान्य बदलाव दिखने पर पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।
मौसम के अनुसार खेती करने से किसानों को मिलेगा फायदा
नवंबर की शुरुआत के साथ मौसम में आ रहा बदलाव किसानों के लिए रबी सीजन की तैयारी का संकेत है। शुष्क मौसम रहने की संभावना से खेतों की जुताई, बुआई और फसलों की देखभाल में सुविधा मिल सकती है।
कृषि वैज्ञानिकों की सलाह है कि किसान मौसम के पूर्वानुमान और खेतों की वास्तविक स्थिति को ध्यान में रखते हुए खेती के कार्य करें। सही समय पर बुआई, उचित बीज का चयन और वैज्ञानिक तरीके से फसल प्रबंधन अपनाकर किसान बेहतर उत्पादन की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं।
