नवगछिया में खेती का नया प्रयोग: डिमाहा में 20 बीघा में लहलहा रही सोयाबीन, किसानों को अच्छी कमाई की उम्मीद
नवगछिया। नवगछिया अनुमंडल के डिमाहा गांव में किसानों ने पारंपरिक खेती से हटकर सोयाबीन की खेती की नई पहल की है। इस बार गांव में करीब 20 बीघा जमीन पर सोयाबीन की फसल लगाई गई है। बिंदुटोली तटबंध और ब्रह्मोत्तर बांध सुरक्षित रहने के कारण खेतों में पानी नहीं भरने से किसानों को खरीफ सीजन में सोयाबीन की खेती करने का अवसर मिला। खेतों में सोयाबीन की फसल अच्छी स्थिति में है और किसानों को इससे बेहतर आमदनी की उम्मीद है।
नवगछिया क्षेत्र में आमतौर पर मक्का, गेहूं और केले की खेती प्रमुख रूप से की जाती है। लेकिन डिमाहा गांव के किसानों ने इस बार पारंपरिक फसलों के बजाय सोयाबीन की खेती को प्राथमिकता दी है। तटबंध के आसपास की जमीन पर सोयाबीन की फसल लहलहा रही है। किसानों का कहना है कि यदि मौसम अनुकूल रहा तो इस प्रयोग से उन्हें अच्छी कमाई हो सकती है।
पानी जमा रहने से पहले खेती करना था मुश्किल
डिमाहा गांव के किसान अजय चौधरी ने बताया कि पहले खेतों में पानी जमा रहने के कारण खेती करना काफी मुश्किल होता था। खेतों में जलजमाव की समस्या के चलते किसानों को फसल लगाने में परेशानी होती थी। इस बार खरीफ सीजन में खेतों में पानी नहीं भरने से सोयाबीन की खेती करने का निर्णय लिया गया।

उन्होंने बताया कि सोयाबीन के बीज बेगूसराय से मंगाए गए थे। किसानों ने करीब 20 बीघा जमीन पर इसकी खेती की है। फिलहाल फसल की स्थिति अच्छी है और किसानों को उपज से बेहतर आमदनी की उम्मीद है।
एक बीघा में 10 हजार रुपये लागत, 7 से 8 क्विंटल उपज की उम्मीद
किसान अजय चौधरी के अनुसार, सोयाबीन की खेती में प्रति बीघा करीब 10 हजार रुपये की लागत आती है। एक बीघा में 7 से 8 क्विंटल तक उपज होने की उम्मीद है। बाजार में सोयाबीन का भाव 6 से 7 हजार रुपये प्रति क्विंटल बताया जा रहा है।
इस हिसाब से किसानों को प्रति बीघा करीब 42 हजार से 56 हजार रुपये तक की सकल बिक्री मिलने की संभावना है। लागत घटाने के बाद भी किसानों को अच्छी आमदनी की उम्मीद है। हालांकि, वास्तविक मुनाफा उपज, बाजार भाव और अन्य खर्चों पर निर्भर करेगा।
अगले खरीफ सीजन में बढ़ेगा सोयाबीन की खेती का रकबा
डिमाहा में सोयाबीन की खेती के शुरुआती परिणाम से किसान उत्साहित हैं। किसानों का कहना है कि यदि इस बार उत्पादन और बाजार भाव अनुकूल रहे तो अगले खरीफ सीजन में सोयाबीन की खेती का रकबा बढ़ाया जाएगा।
इससे क्षेत्र में फसल विविधीकरण को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। पारंपरिक फसलों के साथ नई फसलों को अपनाने से किसानों को आमदनी के नए विकल्प मिल सकते हैं।
प्रखंड कृषि पदाधिकारी आयुष तिवारी ने बताया कि डिमाहा गांव में सोयाबीन की खेती की गई है। इसकी रिपोर्ट तैयार की जाएगी। कृषि विभाग की ओर से फसल की स्थिति और खेती से जुड़े अन्य पहलुओं की जानकारी जुटाई जाएगी।
