दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल का मुकदमा लड़ रहे वरिष्ठ वकील राम जेठमलानी की फीस को लेकर कानूनी राय ले रहे हैं. इस बीच जेठमलानी का बड़ा बयान आया है.
जेठमलानी ने कहा है कि मैं अमीर लोगों से पैसे लैता हूं लेकिन गरीबों के लिए मुफ्त में पैरवी करता हूं.
उन्होंने कहा, ‘अगर अब भी आप सरकार या केजरीवाल मेरी फीस नहीं दे पाते हैं तो मैं उनके लिए मुफ्त में पैरवी करूंगा. मैं उन्हें एक गरीब क्लाइट मानूंगा.’

जेठमलानी ने कहा, ‘यह सब जेटली द्वारा उठाया गया मामला है, वह मेरे क्रॉस एग्जामिन से घबरा गए हैं.’
दरअसल, अरविंद केजरीवाल के ऊपर केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने मानहानि का मुकदमा किया है, जिसमें रामजेठमलानी केजरीवाल की ओर से बतौर वकील पेश होते हैं.
जेठमलानी केजरीवाल की तरफ से 11 बार अदालत में पेश हो चुके हैं. जेठमलानी ने इसके लिए 1 करोड़ रुपए का रिटेनर और प्रति सुनवाई 22 लाख रुपए की फीस रखी है. इस तरफ जेठमलानी की कुल फीस 3.42 करोड़ रुपए हो गई है.
केजरीवाल उनकी फीस का भुगतान सरकारी खर्च से चाहते हैं. उपराज्यपाल बैजल ने फीस से जुड़े बिलों को पास करने को लेकर सॉलीसीटर जनरल रंजीत कुमार से सलाह मांगी है कि सरकार को यह भुगतान करना चाहिए या नहीं.
गौरतलब है कि दिल्ली सरकार के कानून विभाग ने उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के एक नोट के उत्तर में कहा था कि इन बिलों के भुगतान के लिए उपराज्यपाल का हस्ताक्षर आवश्यक है.
सूत्रों ने कहा, सिसोदिया ने दिसंबर में वकील राम जेठमलानी की फीस भरने के लिए कुछ अग्रिम राशि देने को भी कहा था.
सूत्रों का कहना है कि जेठमलानी की फीस का करीब तीन करोड़ रूपया बकाया है और कानून विभाग का मानना है कि जब मुकदमा सरकार से जुड़ा हुआ नहीं है तो उसकी फीस का भुगतान सरकारी खर्च क्यों होना चाहिए.

