नवगछिया : रक्त का सीधा संबंध पृथ्वी व जल तत्व से है तथा ग्रहों में इसका रिश्ता मंगल से है जो कि लाल रंग का प्रतिनिधि कहा जाता है। पृथ्वी तत्व का संबंध मूलाधार से है जिसके अधिष्ठातृ दैव भगवान गणेशजी हैं तथा यहाँ का बीज मंत्र ‘लं हैं। जिन लोगों के किसी भी प्रकार के काम रुके हुए हैं, जमीन-जायदाद और मकान से संबंधित परेशानी हो, भय की भावना रहती हो, बार-बार दुर्घटनाओं में रक्त बहने जैसी समस्याएं सामने हों, उनके लिए मंगल के सभी दोषों का परिहार रक्तदान से हो जाता है।

मान्यता के अनुसार चारों युग के धार्मिक कृत्य प्रमुख रूप से अलग-अलग कहे गए हैं। सतयुग में तप, त्रेता में ज्ञान, द्वापर में यज्ञ और कलयुग में दान को प्रमुख बताया गया है। वेदों एवं हमारे सभी शास्त्रों में दान को सबसे बड़ा पुण्य माना गया है। दान द्वारा व्यक्ति को जो आत्मिक सुख और शांति प्राप्त होती है वह अनमोल है। दान करने से दाता को मानसिक शांति, सुख तथा पुण्य तो प्राप्त होता ही है दान प्राप्त व्यक्ति की दुआ भी मिलती है और अगर यह दान रक्तदान कर किसी के जीवन बचाने का पुण्य हो तो इसमें पुण्य कई गुणा बढ़ जाता है। रक्तदान द्वारा किसी को नवजीवन देकर जो आत्मिक आनन्द मिलता है उसका न तो कोई मूल्य ऑंका जा सकता है न ही उसे शब्दों में व्यक्त किया जा सकता है। चिकित्सकीय दृष्टि से भी देखा जाए तो रक्तदान करने से खून में बढ़ते कोलेस्ट्रॉल के कारण रक्त प्रवाह में डाल रही बाधा को दूर करता है। रक्तदान, रक्त बनाने की क्रिया को भी तीव्र कर देता है। कई बार जीवन बचाने के लिए खून चढाने की जरूरत पडती है जिसमें प्रमुख रूप से दुर्घटना, रक्तस्त्राव, प्रसवकाल और ऑपरेशन आदि है, ऐसे समय में जिसके कारण अत्यधिक खून बह सकता है और इस अवसर पर खून की आवश्यकता पडती है। थेलेसिमिया, ल्यूकिमिया, हीमोफिलिया जैसे अनेंक रोगों से पीडित व्यक्तियों के शरीर को भी बार-बार रक्त की आवश्यकता रहती है अन्यथा उनका जीवन खतरे में रहता है। जिसके कारण उनको खून चढाना अनिवार्य हो जाता है। ऐसे लोगों को जिन्हें समय पर रक्त मिल जाए और उनका जीवन सुरक्षित हो तो उनके तथा उनके अपनो द्वारा जो दुआ दी जाती है वह दानकर्ता के जीवन में सुख का संचार कर सकती है। अत: रक्तदान करना कलयुग का सबसे पुण्यदायी कार्य माना जा सकता है क्योंकि इस समय घटनाएॅ दुर्घटनाएॅ तथा सर्जनी के निरंतर बढ़ते युग में रक्तदान सबसे प्रभावी और प्रासंगिक दान कहा जा सकता है। जो व्यक्ति परिवेश, समाज के प्रति संवेदनशील हो जाता है वह दुनिया के वास्तविक एवं शाश्वत आनंद को पाने का हकदार होता है। रक्तदान करना ना सिर्फ दान के लिए अपितु अपने ग्रहों की शांति के लिए भी आवश्यक है। अगर हम रक्तदान और ज्योतिषीय गणना को देखें तो किसी भी जातक की कुंडली में अगर मंगल या केतु लग्र, द्वितीय, तृतीय, एकादश अथवा द्वादश स्थान में हों या इन स्थानों के स्वामी होकर छठवे, आठवे या बारहवे स्थान पर बैठ जाए तो ऐसे लोगों तो चोट-मोच तथा दुर्घटना की आशंका रहती है। अगर ऐसे लोग रक्तदान कर अपना रक्त पहले ही निकाल दें तो आकस्मिक चोट से रक्त बहने की स्थिति नहीं निर्मित होगी अर्थात रक्तदान द्वारा मंगल के दोषों की निवृत्ति होती है। साथ ही अगर किसी की कुंडली में शनि तथा केतु का योग किसी भी स्थान में हो अथवा मंगल और शनि की युति बने तो ऐसे लोगों को अचानक सर्जरी की आवश्यकता आ पड़ती है अत: ऐसे लोगों की कुंडली का विश£ेषण कराया जा कर इनकी दशाओं और अंतरदशाओं के पूर्व रक्तदान करने से सर्जरी से बचा जा सकता है। किसी गर्भवती महिला की कुंडली में यदि मंगल तृतीय, चतुर्थ, पंचम भाव या इन भाव का स्वामी होकर छठवे, आठवे या बारहवे स्थान में हो जाए तो ऐसी स्थिति में अगर संतान के जन्म के समय ज्यादा रक्त बहने या रक्तबहाव ना रूकने की स्थिति बन जाती है ऐसी स्थिति में मंगल की शांति करने से भी रक्त बहना रूकता है अत: मंगल और रक्त का संबंध है।

असल में जो काम नाम की भावना के बगैर होता है वही सच्चा परोपकार और पुण्य है। ऐसे लोग जो तारीफों के लिए दान-परोपकार करते हैं, की निन्दा भी नहीं की जानी चाहिए क्योंकि नाम और फोटो छपने की भावना से ही सही, कम से कम ये लोग कुछ तो कर ही रहे हैं वरना समाज के बहुसंख्य लोग वैसे ही अधमरे पड़े हैं और उनके दिल और दिमाग की सारी खिड़कियाँ अन्दर की ओर ही खुलने वाली हैं जहाँ दिखता है सिर्फ उनका परिवार और अपना घर ही।
रक्त दान से मंगल होगा प्रसन्न:
आज अन्नदान, विद्यादान, वस्त्र दान, धन-धान्य दान आदि दानों पर जोर दिया जाता रहा है। इनके साथ ही अन्य कई दान हैं जिनमें रक्तदान की भूमिका जीवनदायी है। यह एक ऐसा दान है जिसका सीधा संबंध जीवनदान से है और जो लोग रक्तदान करते हैं वे जीवनदाता के रूप में पुण्य संचित करते हैं। इस पुण्य का कोई मुकाबला नहीं। यों शारीरिक दृष्टि से भी समय-समय पर रक्तदान करने से सेहत भी अच्छी रहती है और हार्ट अटैक, कॉलेस्ट्रोल, रक्त विकारों आदि कई बीमारियों का स्वत: निदान होता रहता है। लगातार रक्तदान करने वालों का रक्त ताजा और संतुलित होता है और इससे उनके जीवन में भी ताजगी देखी जा सकती है। व्यक्ति के जीवन में रक्तदान से कई प्रकार के परिवर्तन अपने आप आ ही जाते हैं।
चिकित्सा विशेषज्ञ भी इस बात को कहते रहे हैं कि हर व्यक्ति को रक्तदान करना चाहिए। इससे कई समस्याएं अपने आप ठीक हो जाती हैं। रक्तदान की नियमितता से रुधिर के नवीनीकरण और निरन्तर उत्पादन की प्रक्रिया भी मजबूत होती है। जिसके शरीर में रक्त अच्छा होता है, उसकी सेहत भी अच्छी होती है। सभी दानों को कर चुके लोगों को भी सोचना चाहिए कि रक्तदान करने से भी क्यों चुकें। यहाँ हम रक्तदान के योग एवं ज्योतिषीय पहलुओं पर ही चर्चा करें तो रक्तदान जीवन की कई समस्याओं से मुक्ति की राह प्रशस्त करता है। रक्त का सीधा संबंध पृथ्वी व जल तत्व से है तथा ग्रहों में इसका रिश्ता मंगल से है जो कि लाल रंग का प्रतिनिधि कहा जाता है। बार-बार दुर्घटनाओं में रक्त बहने जैसी समस्याएं सामने हों, उनके लिए मंगल के सभी दोषों का परिहार रक्तदान से हो जाता है। व्यक्ति के जीवन में जितना रुधिर शरीर से निकलना लिखा होगा, उतना निकलेगा ही। चाहे वह दुर्घटना से निकलकर बह जाए या और किसी कारण से। ऐसे में रक्तदान कर लिए जाने मात्र से इस होनी को टाला जा सकता है और जीवन में दुर्घटनाओं से बचा जा सकता है।
जिन लोगों को मांगलिक दोष है और इस वजह से दाम्पत्य सुख प्राप्त नहीं हो पा रहा है, घर में कलह है, शादी नहीं हो पा रही है, उनके लिए मंगल को प्रसन्न करने के लिए रक्तदान से बड़ा कोई पुण्य है ही नहीं। रक्तदान कर लिए जाने से ही मंगल दोष का परिहार हो सकता है। शेष सभी प्रकार के दान उपयोग के बाद नष्ट हो जाने वाले और जड़ होते हैं, सिर्फ रक्तदान ही एकमात्र ऐसा दान है जो सदैव चेतन रहता है और दशकों तक जीवंत स्वरूप में ही रहता है इसलिए इस सदा-जीवंत व चेतन दान का महत्व सबसे अधिक है।
इस दान में दाता का अहंकार भी नहीं होता क्योंकि हमें अधिकांशत: यह पता भी नहीं होता कि हमारा दिया हुआ खून किसे चढ़ाया गया है। इसी प्रकार जिसे चढ़ाया जाता है उसे भी नहीं पता होता है कि यह किसने दिया है। इस प्रकार दाता और ग्रहण करने वाले दोनों के लिए यह गुप्त दान के रूप से अनंत पुण्य का सृजन करता है। मंगल खराब होने की वजह से कई लोगों के काम रुके रहते हैं। इन लोगों के लिए भी रक्तदान करना ठीक होता है। मंगल की दशा चल रही हो, गोचर या जन्म कुण्डली में मंगल का बुरा प्रभाव हो, ऐसे सभी लोगों को रक्तदान से फायदा हो सकता है। इन सभी लोगों को मंगलवार के दिन रक्तदान करना चाहिए। रक्तदान से अग्नि दुर्घटनाओं का भी खतरा टल जाता है। मंगल भूमिपुत्र है इसलिए भूमि से संबंधित जो भी काम मंगल के कारण रुके हुए हों, उनका समाधान भी रक्तदान से हो सकता है। मकान के योग नहीं बन रहे हों, जमीन से संबंधित कोई समस्या हो, खेत में अनाज बराबर नहीं पक रहा हो, कीटों का खतरा हो, रिसोर्ट, होटल, फार्म हाउस में कोई दिक्कत हो अथवा भूमि से संबंधित कोई भी परेशानी हो, इसका कारक ग्रह मंगल है और मंगल का दोष निवारण करने तथा मंगल को प्रसन्न रखने के लिए रक्तदान को अपनाया जाए तो काफी हद तक हमारी समस्याओं का समाधान शीघ्र हो सकता है।
जमीन में गड़े हुए धन की प्राप्ति से लेकर जमीन की ऊर्वरा शक्ति बढ़ाने तक सारे कामों में मंगल को खुश करने के लिए खून का दान किया जाना चाहिए। मंगल लाल रंग वाला ग्रह है। लाल रंग सौभाग्य का प्रतीक है तथा गुस्से का भी। जिन लोगों को बात-बात में गुस्सा आता हो, चिड़चिड़ापन हो तथा मानसिक उद्विग्नता रहती हो, उन लोगों का स्वभाव भी रक्तदान से बदल सकता है। इसी प्रकार दाम्पत्य और प्रेम संबंधों को प्रगाढ़ करने, सुख-सौभाग्य की निरन्तरता बनाए रखने में भी मंगल प्रभावी कारक होता है। प्रेम संबंधों के लिए शुक्र कारक ग्रह जरूर है जिसके प्रभावी होने पर ही प्रेम होता है लेकिन मंगल यदि ठीक नहीं होगा तब प्रेमी-प्रेमिका या पति-पत्नी में बात-बात में कुतर्क और संघर्ष की स्थितियां पैदा होंगी, इसलिए प्रेमी युगलों के लिए और दाम्पत्य सुख को निरन्तर तथा प्रगाढ़ बनाए रखने के लिए भी रक्तदान का सहारा लिया जाकर मंगल को प्रसन्न रखा जा सकता है। योग मार्ग का आश्रय ग्रहण करने वाले लोगों के लिए भी चक्रों में जागरण में रक्तदान से मदद मिल सकती है। पृथ्वी तत्व की सिद्धि और मंगल की प्रसन्नता के बगैर मूलाधार चक्र का जागरण तक संभव नहीं है। जीवन में जितनी अधिक बार संभव हो, रक्तदान करें और सेहत तथा समृद्धि का लाभ पाएं।

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By न्यूज़ डेस्क

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