गोपालपुर : 80 के दशक में भागलपुर जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों में बेलगाम अपराधियों पर नियंत्रण करने के लिये भागलपुर पुलिस ने ऑपरेशन गंगा जल चलाया था. ऑपरेशन गंगाजल के बाद अपराध पर ततकाल नियंत्रण हुआ था. लेकिन भागलपुर पुलिस को इस मामले में काफी बदनामी झेलनी पडी थी और कई पुलिस पदाधिकारियों को जेल की हवा भी खानी पडी थी. गोपालपुर थाना क्षेत्र जो कि कटिहार जिले की सीमा तक व हाइलेवल घाट तक फैला हुआ था. गंगा व कोसी नदी का दियारा क्षेत्र होने के कारण अपराधियों का बोलबाला था. दिन दहाडे किसी की हत्या करना अपराधियों के लिये मामूली बात थी. संसाधन के अभाव में पुलिस चाह कर भी कुछ खास नहीं कर पा रही थी.
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मिली जानकारी के अनुसार 20 जनवरी 1980 को जहाँ चारो तरफ सरस्वती पूजा धूमधाम से मनाया जा रहा था. उसी समय मकंदपुर चौक पर लत्तीपाकर के सम्मानित लाला बाबू की हत्या गोली मारकर लत्तीपाकर के कुख्यात अपराधी माँगन मियाँ व अभिया के श्रीनिवास तीतर ने गोली मारकर हत्या कर पुलिस प्रशासन को खुली चुनौती दे दी. इस हत्याकांड से बिहार सरकार की काफी किरकिरी हुई. अमन चैन कायम करने हेतु व बढते अपराध पर काबू पाने हेतु गोपालपुर थाना में पहली बार सीआरपीएफ की तैनाती कर ततकालीन एसडीपीओ के नेतृत्त्व में बेखौफ अपराधियों की गिरफ्तारी हेतु टास्क फोर्स का गठन किया गया.

काफी मशक्कत के बाद दोनों अपराधियों को गिरफ्तार कर लिया गया और ऑपरेशन गंगा जल के तहत दोनों अपराधियों की आँखों में एसिड डाल दिया गया. ताकि जिन्दगी भर चाहकर भी वे अपराध नहीं कर सके. बाद नाथनगर, कहलगाँव आदि थाने की पुलिस ने अपराधियों को गिरफ्तार कर ऑपरेशन गंगा जल चलाया. हालाँकि बाद में ऑपरेशन गंगा जल के तहत पीडित अपराधियों को सरकार द्वारा मुआवजे के रूप में मोटी रकम, पेंशन व जीविकोपार्जन हेतु कुटीर उद्योग चलाने की ट्रेनिंग दी गई. हालाँकि फिलहाल दोनों ही अपराधियों की मृत्यु हो चुकी है. परन्तु गोपालपुर थाना क्षेत्र के अभिया, लत्तीपाकर सहित आसपास के लोगों में अभी भी पुलिस द्वारा चलाये गये ऑपरेशन गंगा जल की याद है. बाद में बिहार के फिल्मकार प्रकाश झा ने ऑपरेशन गंगाजल के नाम पर गंगाजल फिल्म बनाकर पूरे देश में पुलिस के इस चेहरे को दिखाया था.

