सासद शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल ने लोकसभा में निषाद जाति और इसकी उपजाति को अनुसूचित जाति में शामिल किए जाने की माग की। उन्होंने कहा कि 2004 में निषाद समुदाय की आर्थिक, सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन पर विचार करते हुए राज्य सरकार ने विधानसभा में प्रस्ताव लाया था। इसे विधानसभा द्वारा पारित कर आठ नवंबर 2004 को अन्य जातियों के साथ मल्लाह एवं बिंद जाति को अनुसूचित जाति में शामिल करने की अनुशंसा भारत सरकार से की थी।
मंत्रालय ने मांगी थी सर्वे रिपोर्ट :
राज्य सरकार की अनुशसा पर भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा सर्वे रिपोर्ट की माग की गई थी, जिसे राज्य सरकार के निर्देश पर एएन सिन्हा इंस्टीच्यूट द्वारा 27 जिलों का सर्वेक्षण रिपोर्ट तैयार कर भेजा गया था। ओआरजीआइ द्वारा दस विवेचित बिंदुओं पर कमेंट मागा था, लेकिन तत्कालीन सरकार ने बिना अपने कमेंट के प्रस्ताव भारत सरकार को भेज दिया। इस रिपोर्ट पर ओआरजीआइ की असहमति के बाद भारत सरकार ने प्रस्ताव को अस्वीकृत कर दिया। पुन: बिहार विधानसभा में 2015 में राज्य सरकार ने निषाद जातियों के आठ उपजातियों मल्लाह, बिंद, चाई, बेलदार, तियर, खुलवत, सुरहिया, गोढ़ी, वनपन एवं केवट सहित नोनिया जाति को एसटी में शामिल करने की अनुशंसा पर जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा पुन: सर्वे रिपोर्ट की मांग की गई।

राज्य सरकार की वर्तमान अनुशंसा त्रुटिपूर्ण :
आठ जिलों के सर्वे में पाच उपजातियों गंगोता, गोरियारी, कैवर्त और अन्य दो को छोड़ दिया गया। बिहार सरकार ने इठनोग्राफिकल सर्वे के आधार पर आठ उपजातियों को अनुसूचित जनजाति में शामिल करने की अनुशंसा भारत सरकार के पास भेजी है, जो कि अनुचित है। यह सभी उपजातिया एसटी की सूची में शामिल होने के लिए भारत सरकार की गाइडलाइन की अहर्ताएं पूरी नहीं करती हैं। एसटी की सूची में शामिल होने के लिए पाच में से मात्र एक अहर्ता पूरी करने के कारण यह प्रस्ताव स्वत: ही अस्वीकृत हो जाना चाहिए क्योंकि यह संविधान सम्मत नहीं है।
सांसद ने की सरकार से मांग :
उन्होंने सदन के माध्यम से सरकार से माग की है कि एसटी में शामिल करने के प्रस्ताव को अमान्य कर 2004 की अनुशंसा के आधार पर निषाद जाति तथा गंगोता सहित सभी उपजातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने हेतु आदेश दिया जाय जिससे निषाद समुदाय के उपजातियों का सर्वागीण विकास हो सके।


