भागलपुर और बांका के अलग- अलग हिस्सों में छापेमारी कर चोरी की 12 बाइक के साथ अाठ शातिर चोरों को सरगना के साथ गिरफ्तार कर, बड़े बाइक चोर गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने इनके पास से 11 मोबाइल भी बरामद किया है। गिरफ्तार शातिरों में दो गैराज मालिक हैं, जो चोरी की बाइक को खपाते थे। पुलिस की दबिश देख सजौर और कजरैली इलाके में कई बाइक खेतों में फेंकी मिलीं। पिछले पांच साल में पकड़े गए बाइक चोर गिरोह का यह सबसे बड़ा गैंग है। इस गिरोह ने बीते छह माह में शहर के अलग-अलग हिस्सों से 200 बाइक चुराई, जिसे अलग-अलग गैराजों में बेच दिया। सभी गिरफ्तार शातिरों से पुलिस पूछताछ कर रही है। इसके आधार पर भागलपुर समेत आसपास में चल रहे गैराजों में पुलिस की छापेमारी अभी जारी है। इसका खुलासा शुक्रवार को एसएसपी आशीष भारती ने मीडिया के सामने किया।

सिटी डीएसपी राजवंश सिंह के नेतृत्व में पुलिस ने शहर से बाइक चुराकर बेचने वाले बड़े बाइक चोर गिरोह का खुलासा किया।
गिरफ्तार शातिर बाइक चोर और इनके पास से बरामद बाइक।
सफलता:पिछले पांच साल में पकड़े गए बाइक चोर गिरोह का यह सबसे बड़ा गैंग

एसएसपी ने बताया कि शहरी इलाके में बाइक चोरी की बढ़ती घटना पर अंकुश लगाने के लिए सिटी डीएसपी के नेतृत्व में एक टीम का गठन किया गया था। इस टीम ने चार जुलाई को चोरी की बाइक के साथ आरोपियों को गिरफ्तार किया। जिन्होंने गिरोह के अन्य सदस्यों की जानकारी दी। इसकेबाद टीम ने छापेमारी कर बाइक चोर गिरोह के सरगना अवधेश सिंह को उठाया। वह सजौर के दरहादी गांव का रहने वाला है। पुलिस ने इसकी निशानदेही पर भागलपुर और बांका के अलग-अलग हिस्सों में छापेमारी की, जिसमें पुलिस को बड़े बाइक चोर गिरोह का भंडाफोड़ करने में कामयाबी मिली। बरामद बाइकों में कोतवाली और मोजाहिदपुर इलाके से चोरी हुई बाइकें भी शामिल हैं। कुछ दिन पहले तातारपुर पुलिस ने बांका में छापेमारी कर चोरी की तीन बाइक को बरामद किया था।

सजौर के दो गैराज मालिक गिरफ्तार, बरामद बाइकों में कोतवाली और मोजाहिदपुर इलाके से चोरी हुई गाड़ियां भी शामिल बड़े से बड़े लॉक को चुटकी में खोलने में माहिर हैं सभी शातिर गिरफ्तार बाइक चोर गिरोह का सरगना अवधेश सिंह ने बताया कि गैंग के सदस्य बड़े से बड़े बाइक और गाड़ियों के लॉक को चुटकी में खोलने और तोड़ने के माहिर हैं। पहले मास्टर चाबी से गाड़ियों के हैंडिल लॉक को खोला जाता है। यह चाबियां सामान्य से थोड़ी बड़ी होती हैं। लॉक में चाबी घुसाकर ऐंठने मात्र से ही हैंडिल का लॉक खुल जाता है। जिन गाड़ियों का लॉक घिस जाता है, उसे सामान्य चाबी से आसानी से खोल दिया जाता है। जिन गाड़ियों में डबल लॉक या व्हील लॉक रहता है, उसे चुराना आसान नहीं होता है। ऐसी गाड़ियों को गिरोह के सदस्य नहीं चुराते हैं। क्योंकि इसमें रंगे हाथ पकड़े जाने का खतरा ज्यादा रहता है। अवधेश के खिलाफ अमरपुर थाने में पहले भी बाइक चोरी का केस दर्ज है।

छापेमारी की विशेष टीम में ये थे शामिल

सिटी डीएसपी राजवंश सिंह के नेतृत्व में बनी टीम में तिलकामांझी थानेदार संजय कुमार सत्यार्थी, जीरोमाइल थानेदार रंजन कुमार, जोगसर थानेदार राजनंदन कुमार, दारोगा अजीतकुमार, डीआईयू कर्मी पंकज कुमार भारती और चीता दल के जवान शामिल हैं।
1. मुकेश कुमार सिंह : मंझलाचक, सजौर
2. भरत कुमार सिंह : मंझलाचक, सजौर
3. विकास पासवान : हरनाथपुर, सजौर
4. साजन कुमार साह : रतनगंज, सजौर
5. अवधेश कुमार सिंह : दरहादी, सजौर
6. गुड्डू दास : हरिजन टोेला, कजरैली
7. गैराज मालिक अमित मंडल : दरियापुर, सजौर
8. गैराज मालिक विजय चौधरी : दरहादी, सजौर ये बाइक बरामद हुई

{ हीरो होंडा प्रो बिना नंबर की { हीरो होंडा स्प्लेंडर बीआर 10 बी-2987 { टीवीएस मैक्स-100 बीआर 10 सी-6753 { हीरो होंडा सीडी डीलक्स बीआर 10ई- 3266 { यामाहा आर-15 स्प्लेंडर बीआर 10 एफ-8551 { टीवीएस अपाची-160 बिना नंबर की { होंडा साइन बीआर 10 एल- { हीरो आई स्मार्ट बीआर 10 टी-8051 { टीवीएस स्टार बीआर 10 एच- 1146 { हीरो होंडा सुपर स्प्लेंडर बीआर 10 डब्ल्यू-7915 { हीरो होंडा स्प्लेंडर प्लस बीआर 10 एल-6805 { हीरो होंडा स्प्लेंडर प्रो बिना नंबर की ये हुए गिरफ्तार सेफ हैं डबल लॉक या व्हील लॉक वाली गाड़ियां गाड़ियों में डबल लॉक या व्हील लॉक अवश्य लगाएं। ऐसी लॉक वाली गाड़ियां सेफ हैं।

इन्हें चुराना आसान नहीं होता है,

इसलिए इन गाड़ियों को चोर नहीं चुराते हैं।कारण चोरों को इसमें रंगे हाथ पकड़े जाने का खतरा अधिक रहता है। ऐसे काम करता था गिरोह रेकी करने वाला : गिरोह तीन स्तरों पर काम करता है। सबसे पहले वह जो शहर में घूम-घूमकर रेकी करता है और जिन गाड़ियों को चुराना है, उसे चिह्नित करता है। जिन स्थानों पर बाइक ज्यादा खड़ी रहती है, वहां चोरी करना आसान होता है। चुराने वाला : दूसरा वह जो मास्टर चाबी से गाड़ियों के लॉक खोलता है और उसे चुरा कर ले जाता है। इसमें दो लोग शामिल रहते हैं। चोरी के बाद गाड़ियों को कहां छिपाना है, यह पहले से निर्धारित रहता है।

गैराज वाला : चोरी की बाइक को खपाना सबसे कठिन होता है। इसलिए इसमें गैराज का सहारा लिया जाता है। गिरफ्तार अमित मंडल और विजय चौधरी गैराज चलाते हैं। चोर इन्हीं के गैराज मालिकों मात्र 8-10 हजार में बाइक बेच देते हैं। खरीदार : गैराज मालिक चोरी की बाइक का नंबर, कलर, मॉडल बदल कर उसे ऊंचे दामों में बेचते हैं। कई बार गाड़ी का इंजन और चेसिस नंबर तक बदल दिए जाते हैं। यदि चोर सीधा खरीदार को गाड़ी बेचते हैं, तो उससे 20 हजार तक दाम लिया जाता है।

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By न्यूज़ डेस्क

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