नवगछिया :  भाई-बहन के अटूट प्रेम का त्योहार रक्षाबंधन चार साल बाद इस बार भद्रामुक्त होगा। सूर्योदय व्यापिनी तिथि मानने के कारण रात में भी राखी बांधी जा सकेगी। पंडित अजीत पाण्डेय के अनुसार चार साल बाद ऐसा संयोग बन रहा है। सावन की पूर्णिमा 25 अगस्त दोपहर 3:15 बजे से 26 अगस्त को शाम 5:30 बजे तक रहेगी। खास बात यह है कि इस दिन घनिष्ठा नक्षत्र भी है। यह नक्षत्र दोपहर 12:35 बजे तक रहेगा।

इस बार बहनें अपने भाइयों को सुबह 5:59 मिनट से शाम 4:12 मिनट तक राखी बांध सकेंगी। रक्षाबंधन पर अभिजीत मुहूर्त 2 घंटे 33 मिनट यानी दोपहर 1:39 बजे से शाम 4:12 बजे तक है। पंडित विजयानंद शास्त्री ने बताया कि भद्रा काल में राखी नहीं बांधी जाती है। इस वर्ष एक अच्छी बात यह है कि भद्रा सूर्योदय से पूर्व ही समाप्त हो जाएगा। इस बार सावन पूर्णिमा ग्रहण से मुक्त रहने के कारण रक्षाबंधन का त्योहार सौभाग्यशाली रहेगा।

26 अगस्त की सुबह 5:59 मिनट से शाम 4:12 मिनट तक बांध सकते हैं राखी, 11 घंटे 26 मिनट तक शुभ मुहूर्त

रक्षा बंधन को लेकर बाजार में राखी की खरीदारी करतीं छात्राएं।

पंचक में वर्जित रहते हैं शुभ कार्य

लोगों पंचक में शुभ कार्य नहीं करनी चाहिए। ज्योतिष में कुछ नक्षत्रों में शुभ कार्य करना सही माना जाता है। वहीं कुछ नक्षत्र के ऐसे भी होते हैं जिन्हें बेहद अशुभ माना जाता है। इन नक्षत्रों के किसी भी चरण में शुभ कार्य करने से उसमें बाधा उत्पन्न होती है। घनिष्ठा, शतमिषा, पूर्वा भाद्रपद, उत्तर भाद्रपद व रेवती आदि नक्षत्र अशुभ माने जाते हैं। घनिष्ठा के प्रारंभ से लेकर रेवती के अंत तक का समय अशुभ माना गया है और इसे पंचक कहा जाता है। लेकिन पंचक का संयोग राखी बांधने में कोई बाधा उत्पन्न नहीं करेगा।

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By न्यूज़ डेस्क

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