नाजिर राकेश की मौत के बाद मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंची उसकी पत्नी और मां के विलाप ने अस्पताल में मौजूद हर शख्स को हिलाकर रख दिया। शिशुरोग विशेषज्ञ डॉ. बीपी साहा अपने बेटेसंजीव को देखने पहुंचे तो डॉक्टरों ने पहले तो उन्हें हिम्मत दी। फिर भी डॉ. साहा नहीं माने और सीओटी में घुस गए तो डॉक्टरों ने कहा, डॉक्टर साहब, दिल मजबूत कर लीजिए। सब भगवान पर छोड़ दीजिए। यह सुनते ही डॉ. साहा की आंखें डबडबा गईं।
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कुछ ही देर आईसीयू में भर्ती संजीव की मौत की खबर आई तो वे बदहवास हो गए। जख्मी संजीव के पिता डॉ. बीपी साहा पत्नी के साथ वे मायागंज अस्पताल पहुंचे। उस समय संजीव का सीओटी में इलाज चल रहा था, और संजीव की पत्नी कंचन का एक्स-रे हो रहा था। बेटे को देखने के लिए सीटीओ में घुस गए। डॉ. अशोक ने उन्हें बताया कि संजीव की हालत काफी गंभीर है। यह सुन डॉक्टर पिता की आंखें डबडबा गई।

कुछ देर बाद आइसीयू में भर्ती होने के बाद ही संजीव की इलाज के दौरान मौत हो गई। बाल-बाल बचा टेम्पो ड्राइवर ललन घनघोर स्वीट्स के पास टेम्पो लगा कर नाथनगर के किसनपुर गांव निवासी ललन यादव तेल और रिफाइन का टिन उतार रहा था। तभी पेड़ गिरा, जिसमें टेम्पो दब गया। अगर पल भर भी देरी होती तो टेम्पो के साथ ललन भी पेड़ की चपेट में आ जाता। पेड़ की टहनी से उसका पैर चोटिल हुआ है।

मनीष और सोनू ने दिखाई मानवता जगदीशपुर निवासी मनीष और सोनू एसडीओ ऑफिस में किसी काम से आए थे। दोनों की आंख के सामने ही हादसा हुआ। घायलों को पेड़ के नीचे से निकालकर अस्पताल पहुंचाने और इलाज करवाने में दोनों युवकों ने सहयोग किया। दोनों के परिजन के अस्पताल पहुंचने पर सोनू अौर मनीष ने संजीव की मोबाइल व अन्य सामान वापस कर दिया।

