नवगछिया : रंगरा प्रखंड स्थित रंगरा का दुर्गा मंदिर आस्था का केंद्र बिंदु माना जाता है. यह रंगरा प्रखंड का सर्वाधिक लोकप्रिय एवं प्रतिष्ठित मंदिर है. जहां प्रतिवर्ष प्रखंड क्षेत्र के रंगरा, सधुआ, चापर, मुरली, बनिया, मदरौनी, सहौरा, डुमरिया, तिरासी, कालूचक, तीनटंगा दियारा, आजमाबाद, आदि दर्जनों गांवों के हजारों श्रद्धालु एवं भक्तजन पूजा अर्चना करने के लिए मां के दरबार में आते हैं. मंदिर के बारे में पूजा कमेटी के अध्यक्ष अधिवक्ता गौतम कुमार सिंह एवं सचिव सेवानिवृत्त शिक्षक प्रभाकर सिंह ने बताया कि इस मंदिर की स्थापना सन 1982 ईस्वी में गांव के ही 5 युवकों के द्वारा कलश स्थापित कर की गई थी.


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इसके बाद लगातार 4 वर्ष तक मंदिर में कलश की स्थापना होती रही. 5वें वर्ष 1986 में सार्वजनिक रूप से प्रतिमा स्थापना के लिए पूजा समिति के द्वारा विचार किया गया. इसी वर्ष मंदिर में प्रतिमा स्थापित की गई. तब से ही मंदिर में प्रतिमा स्थापित कर जिले के पैमाने पर चर्चित शास्त्र एवं वेदों के ज्ञाता एवं प्रकांड विद्वान पंडित अनिरूद्ध ठाकुर के द्वारा शास्त्रीय एवं वैदिक विधि से पूजन की जा रही थी. इसके बाद उनके निधन के उपरांत आचार्य शंभू नाथ वैदिक के द्वारा वर्तमान में प्रतिवर्ष मंदिर में मां भगवती की पूजा हो रही है. इस मंदिर में नवमी के दिन एक हजार से भी अधिक पाठा की बलि दी जाती है.

वहीं पंडित शंभूनाथ वैदिक ने बताया कि इस मंदिर में वैदिक रीति रिवाज व राजश्री पूजा पद्धति से मैया का पुजा किया जाता है. इस मंदिर की एक विशेष खासियत है कि आज तक जो भी श्रद्धालु एवं भक्तजन निस्वार्थ भाव एवं श्रद्धापूर्वक मां के दरबार में सर झुकाते हैं. उनकी बिना मांगे मन्नते पूरी करती हैं. इस मंदिर का सबसे आश्चर्यजनक एवं सुखद पहलू है कि यहां मुस्लिम धर्म के लोग भी सर झुकाने आते हैं और मन्नतें पूरी होने पर अपने नाम से पाठा की बलि चढाते हैं. इसके अलावा इस मंदिर की एक खास विशेषता है.

कि भगवती क्रीड़ा मैदान में जो भी युवा दौड़ लगाते हैं. सेना केंद्र एवं राज्य के पुलिस विभाग में उनकी नौकरी पक्की मानी जाती है. अब तक 200 से अधिक युवाओं को इन विभागों में नौकरियां मिल चुकी है. ऐसे युवा प्रतिवर्ष दुर्गा पूजा में छुट्टी लेकर घर आते हैं और श्रद्धा पूर्वक नवरात्रि कर पूजा में भाग लेते हैं. इस मौके पर मेला कमेटी के द्वारा वृहद पैमाने पर मेले का भी आयोजन किया जाता है. साथ ही साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम के तहत दो रात्रि का भक्ति जागरण का कार्यक्रम भी किया जाता है. इस अवसर पर शैलेंद्र ठाकुर, अशोक सिंह, देवेन्दु मिश्र, सोमेश सिंह व अन्य कई ग्रामीण मौजूद थे.

By Rishav Mishra Krishna

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