कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को देवोत्थान एकादशी पर्व से मांगलिक कार्य शुरू हो जाएंगे। इस बार देवोत्थान एकादशी 19 नवंबर को है। काशी पंचांग के अनुसार दिसंबर में तीन दिन शादी-विवाह के मुहूर्त हैं। वहीं मिथिला पंचांग में दिसंबर में शादी का मुहूर्त नहीं है। काशी पंचांग में जनवरी 2019 से मार्च तक विवाह के 32 शुभ दिन हैं। उसके बाद नया पंचांग आने के बाद ही पता चल सकता है। जबकि मिथिला पंचांग में जनवरी 2019 से जुलाई महीने तक 57 दिन शादी विवाह के मुहूर्त हैं। ज्योतिषाचार्य प्रो. डॉ.सदानंद झा ने बताया कि 13 नवंबर को संध्या 4 बजे पश्चिम दिशा में गुरु अस्त हो रहा है और पुन: 7 दिसंबर शुक्रवार पूरब दिशा में गुरु का उदय दिन में 10:25 मिनट पर होने से शादी-विवाह का मुहूर्त 10 दिसंबर से प्रारंभ होगा। पंडित डॉ. सदानंद झा ने बताया कि शादी-विवाह में गुरु पति-प|ी के सामंजस्य एवं दांपत्य सुख के साथ पुत्र प्राप्ति की दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थान रखता है। गुरु ही ऐश्वर्य वैभव को देने वाला ग्रह है। इसलिए शास्त्र में गुरु के अस्त में विवाह आदि कार्य को वर्जित माना गया है।


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देवोत्थान एकादशी 19 नवंबर को, इसके बाद शुरू होंगे मांगलिक कार्य,10 दिसंबर से शादी-विवाह का शुभ मुहूर्त

मिथिला पंचांग के अनुसार शादी के लिए शुभ मुहूर्त

मिथिला पंचांग के अनुसार जनवरी 2019 में 17, 18, 23, 25, 27, 28 एवं 30 तारीख को, फरवरी में 1, 4, 10, 11, 15, 20, 21, 22, 25 एवं 28 तारीख को और मार्च में 3, 4, 7, 8, 13। अप्रैल 17,18,19,21,22,24,25,26 एवं 28 तारीख को शुभ मुहूर्त है। वहीं मई में 1, 2, 6, 12, 19, 20, 23, 24, 26, 29, 30 और 31 तारीख को और जून में 3, 9, 10, 12, 13, 14, 21, 26, 27, 28, एवं 30 को व जुलाई में 7, 8, एवं 11 तारीख को मुहूर्त है।

काशी पंचांग के अनुसार शादी के लिए शुभ मुहूर्त

दिसंबर में 10, 15 और 16, जनवरी में 17, 18, 22, 23, 25 से 31 तक, फरवरी में 1, 3, 8, 9,10,13, 14, 19, 20, 21, 22, 25, 26, 28 और मार्च में 2, 3, 7, 8, 9, 12, 13, 14 तारीख।

तुलसी विवाह से मिलता है कन्यादान का फल

पंडित डॉ. सदानंद झा ने बताया कि कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को तुलसी पूजन उत्सव मनाया जाता है। तुलसी विवाह कराने से कन्यादान फल की प्राप्ति होती है। तुलसी विवाह के लिए कार्तिक शुक्ल नवमी तिथि उत्तम माना जाता है। नवमी, दशमी, एकादशी का व्रत पूजन कर अगले दिन तुलसी का पौधा दान देना शुभ होता है। परंतु कुछ लोग एकादशी से पूर्णिमा तक तुलसी पूजन करके पांचवें दिन तुलसी का विवाह करते हैं। तुलसी भले ही एक साधारण सा पौधा है, परंतु भारतीयों के लिए यह गंगा जमुना के समान पवित्र है। पूजा की सामग्री में तुलसी दल का होना बड़ा ही महत्व है।

By न्यूज़ डेस्क

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