भागलपुर में रामकृष्ण मिशन केंद्र की स्थापना होगी। इसके लिए सरकारी या दान की जमीन की तलाश की जा रही है। यह निर्णय शनिवार को बूढ़ानाथ मंदिर परिसर में चल रहे बिहार-झारखंड रामकृष्ण विवेकानंद भाव प्रचार परिषद के वार्षिक सम्मेलन के दूसरे दिन लिया गया। श्री रामकृष्ण पाठचक्र,भागलपुर ने यह प्रस्ताव दिया था। इसके साथ ही कई केंद्र के प्रतिनिधियों ने भी अपनी-अपनी बातें रखी। स्वामी भवेशानंद, स्वामी अतिदेवानंद एवं परिषद के अध्यक्ष स्वामी शशांकानंद ने उनकी बातों का जबाव दिया। इस मौके पर स्वामी शशांकानंद ने कहा कि श्रीरामकृष्ण व विवेकानंद के भाव का प्रचार-प्रसार इसलिए जरूरी है ताकि देश के युवा अपने अंदर छुपे मजबूती को पहचान सके और देश के विकास में योगदान दे सके।
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इस मौके पर ‘स्वामी विवेकानंद के शिकागो भाषण में श्रीरामकृष्ण का संदेश व तथा ‘नारी सशक्तिकरण और मां शारदा विषय पर सीताराम प्रसाद, ओमप्रकाश शरण, डॉ. अमिता मोईत्रा, सुरेश नारायण, स्वामी करूणमयानंद व स्वामी भावात्मावंद ने विचार व्यक्त किये। वक्ताओं ने कहा कि स्वामी विवेकानंद रामकृष्ण के ही रूपांतरण है और शिकागो में उनके द्वारा दिये गये व्याख्यान मूलत: रामकृष्ण का ही संदेश है। स्वामी विवेकानंद ने शिकागो में जोर देकर कहा था कि करूणा, दया, प्रेम और सेवा पर किसी एक धर्म का एकाधिकार नहीं है इसलिए सभी धर्म मानव के कल्याण में सक्षम हैं।

सन्यासियों ने ‘समन्वयाचार्य श्रीरामकृष्ण विषय पर विचार रखते हुए कहा कि मानवों की भिन्न-भिन्न स्थितियों और रूचि के कारण उनका कल्याण किसी एक धर्म के लिए संभव नहीं है इसलिए ठाकुर रामकृष्ण का ‘जितने मत, उतने पथ का सिद्धांत आज भी सत्य है। इस मौके पर आलय परिवार के द्वारा ‘स्वामी विवेकानंद एक प्रसंग पर लघुनाटक की प्रस्तुति हुई। जिसमें खेतड़ी, राजस्थान में स्वामी विवेकानंद के जीवन की एक घटना को दर्शाया गया। नाटक में स्वामी विवेकानंद की भूमिका सूरज कुमार ने निभाया। कार्यक्रम के दौरान त्रैमासिक पत्रिका समर्पण की पहली प्रति का विमोचन किया गया। इससे पूर्व सुबह में परिषद की ओर से प्रभातफेरी निकाली गयी थी। जो शहर के विभिन्न जगहों से होते हुए वापस बूढ़ानाथ मंदिर परिसर में आयी। इस मौके पर डॉ. लक्ष्मीकांत सहाय, डॉ. शांतनु घोष, डॉ.तपन कुमार घोष, रघुनाथ भट्टाचार्य, राजीव बनर्जी, गौतम बनजी, दिलीप कुमार भौमिक आदि मौजूद थे।

