सिपाही बहाली में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। यह पिछले वर्ष केंद्रीय चयन पर्षद (सिपाही भर्ती) द्वारा सिपाहियों का बहाली को लेकर निकाले गए विज्ञापन (नंबर-1/2017) से जुड़ा है। 11 जून, 2018 को अंतिम रूप से चयनित व अनुशंसित 9839 अभ्यर्थियों में से 235 अभ्यर्थियों को औपबंधिक रूप से सफल घोषित किया गया था। इनमें से 229 अभ्यर्थी फर्जी निकले, जिन्होंने लिखित परीक्षा में फर्जीवाड़ा कर सफलता पाई थी।
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फॉरेंसिक साइंस लेबोरेट्री में हुई हैंडराइटिंग की जांच में इसका खुलासा हुआ है। 235 अभ्यर्थियों में से 229 की हैंडराइटिंग में अंतर पाया गया। लिखित परीक्षा की राइटिंग आैर वर्तमान हैंडराइटिंग में भिन्नता मिली। इसके अलावा 3 अन्य अभ्यर्थियों की जांच रिपोर्ट नहीं मिली है। यानी 3 अभ्यर्थी सही मिले। इस बीच केंद्रीय चयन पर्षद (सिपाही भर्ती)ने इनकी उम्मीदवारी रद्द कर दी है।
चयन पर्षद की ओर से इनके खिलाफ गर्दनीबाग थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई है। थानाध्यक्ष मनोरंजन भारती के मुताबिक आरोपों को देखते हुए हर पहलू पर जांच की जा रही है। इनकी गिरफ्तारी भी होगी। 229 में पटना, भागलपुर, मुजफ्फरपुर, बांका, नालंदा समेत 26 जिलों के अभ्यर्थी शामिल हैं।

जिला से लेकर यूनिट तक का हो गया था आवंटन
अहम पहलू यह है कि फर्जी पाए गए 229 अभ्यर्थियों को जिला से लेकर इकाई तक का आवंटन हो गया था। यानी, उनकी पोस्टिंग कर दी गई थी। हालात से स्पष्ट है कि तमाम सतर्कता व चौकसी के बावजूद सिपाही बहाली को लेकर हुई लिखित परीक्षा में जालसाजों का गिरोह सेंधमारी करने में सफल रहा। 229 फर्जी अभ्यर्थियों की कथित सफलता के पीछे यही कहानी है। मतलब ओरिजनल अभ्यर्थी के बदले दूसरे ने परीक्षा दी थी। इसके बदले जालसाजों ने हर अभ्यर्थी से मोटी रकम की डीलिंग की थी।

