भागलपुर में दोनों गठबंधनों ने मंडल प्रत्याशी उतार कर मुकाबले को काफी दिलचस्प बना दिया है.लेकिन महागठबंधन के उम्मीदवार बुलो मंडल के इस बार भागलपुर की डगर बेहद मुश्किल होगी.


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भागलपुर: लोकसभा चुनाव की रणभेरी बज चुकी है. तारीखों का ऐलान हो चुका है. भागलपुर में मंडल बहुल इलाके में चुनावी जंग बेहद दिलचल्प हो चुकी है. दोनों गठबंधन मंडल कार्ड खेल कर अपना राजनीतिक हित साधने में लगे हैं. एनडीए ने अजय मंडल को चुनावी मैदान में उतारा है, तो वहीं महागठबंधन की ओर से शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं.

भाजपा के कद्दावर नेता को दी थी शिकस्त
बुलो मंडल ने 2014 के लोकसभा चुनावों की मोदी लहर में भी भागलपुर से भाजपा के कद्दावर नेता शाहनवाज हुसैन को हरा दिया था. इस जीत से उन्होंने अपने मजबूत जनाधार को साबित किया. राजद खेमे से आने वाले शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल मूल रूप से भागलपुर के नवगछिया के एक गांव राघोपुर के रहने वाले हैं.

नहीं हुआ आदर्श गांव का विकास
16वीं लोकसभा में जीत कर भागलपुर का नेतृत्व करने बुलो मंडल दिल्ली पहुंचे थे. आदर्श ग्राम के तौर पर उन्होंने इस्माइलपुर के पश्चिमी भट्टा गांव को गोद लिया था. गांव का विकास करने में बुलो मंडल ने प्रधानमंत्री की योजना का विरोध कर दिया. नतीजतन ना गांव की सड़के सुधर पाई और ना हीं पेयजल की व्यवस्था ही हो सकी. क्षेत्र के लोगों का कहना है सांसद ने विकास के नाम पर क्षेत्र में भेदभाव किया है.

दिलचस्प है मुकाबला
सांसद के 5 साल का रिपोर्ट कार्ड की बात करें तो भागलपुर संसदीय क्षेत्र के लोग उनसे काफी नाराज हैं. बुलो मंडल की संसद में हाजरी 70 फीसदी है. राष्ट्रीय स्तर पर यह आंकड़ा 80% है. अपने कार्यकाल में उन्होंने 50 डिबेट में हिस्सा लिया. उन्होंने संसद में कुल 59 सवाल पूछे. दोनों गठबंधनों ने मंडल प्रत्याशी उतार कर मुकाबले को काफी दिलचस्प बना दिया है.

By न्यूज़ डेस्क

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