वर्ष 2012 के मई माह में बिहार प्रारंभिक शिक्षक पात्रता परीक्षा (बीईटीईटी) परीक्षा पास करने वाले शिक्षक अभ्यर्थियों के लिए खुशखबरी है। राज्य सरकार के शिक्षा विभाग ने उनकी टीईटी उत्तीर्णता की वैधता को 2 साल के लिए बढ़ा दी है। अब मई 2021 तक बिहार के प्रारंभिक स्कूलों में वे नियुक्त किये जा सकते हैं। इनके टीईटी प्रमाण पत्र की वैधता अवधि 14 मई 2019 को समाप्त हो गई थी।
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प्रमाण पत्र वैधता की अवधि बढ़ाने का लाभ लगभग 65 हजार अभ्यर्थिर्यों को टीईटी शिक्षक बनने में मिल सकता है। गौर हो कि इसके पूर्व राज्य सरकार ने माध्यमिक -उच्च माध्यमिक शिक्षकों की एसटीईटी उत्तीर्णता की अवधि दो साल के लिए बढ़ा दी थी और 1 जुलाई को ही हाईस्कूल व प्लसटू शिक्षकों के लिए छठे चरण का नियोजन शिड्यूल भी जारी कर दिया गया है।

मंगलवार को शिक्षा विभाग के उप सचिव अरशद फिरोज ने टीईटी की वैधता दो साल विस्तारित करने का आदेश जारी किया। अधिसूचना के मुताबिक राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई), नई दिल्ली को 2012 में टीईटी पास अभ्यर्थियों के प्रमाण पत्र की वैधता 14 मई 2021 तक विस्तारित करने पर सहमति देने का आग्रह किया गया है। इसको लेकर 14 जून को ही एनसीटीई को शिक्षा विभाग ने पत्र भेजा है।

गौर हो कि टीईटी प्रमाण पत्र की वैधता अवधि 7 साल ही निर्धारित है। इसी दौरान उत्तीर्ण अभ्यर्थी प्रारंभिक शिक्षक के रूप में नियुक्त हो सकते हैं। उप सचिव ने अपने आदेश में कहा है कि राज्य में कोर्ट के आदेश की वजह से 2 साल नियोजन का कार्य नहीं हो सका। इसके लिए संबंधित अभ्यर्थी किसी भी प्रकार से जिम्मेवार नहीं हैं।

समीक्षा के बाद शिक्षा विभाग ने टीईटी पास करने वाले अभ्यर्थियों को शिक्षक बनने के लिए दो साल का और मौका देने का निर्णय लिया है। इस निर्णय के साथ ही शिक्षा विभाग ने इन अभ्यर्थियों को नियुक्त करने की भी तैयारी शुरू कर दी है। संभव है जल्द नियोजन का कार्यक्रम भी घोषित कर दिया जाय। 2015 से राज्य में प्रारंभिक कक्षाओं में शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हुई है।

