नवगछिया। अनुमंडल के राघोपुर गांव को गंगा के भीषण कटाव से बचाने और शहर से दूर जा चुकी गंगा की धारा को दोबारा शहरी तटों की ओर लाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर कवायद तेज हो गई है। राघोपुर में गंगा की मुख्य धारा के प्रचंड दबाव को कम करने के लिए तीन अतिरिक्त उपधाराएं विकसित करने की व्यापक कार्ययोजना तैयार की गई है।

जल संसाधन विभाग और भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI) की संयुक्त तकनीकी टीम ने इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट तैयार की है। प्रस्तावित योजना के तहत नाथनगर क्षेत्र के रत्तीपुर बैरिया, मोहनपुर दियारा और बरारी पुल घाट के समीप बंद या कमजोर हो चुकी जलधाराओं के मुहाने खोलकर उन्हें मुख्य धारा से जोड़ा जाएगा।

योजना के अनुसार इन उपधाराओं का प्रवाह अंततः बरारी में मुख्य गंगा धारा से संगम करेगा। इससे राघोपुर के तट पर पड़ने वाला पानी का दबाव कम होने और कटाव के संकट को नियंत्रित करने की उम्मीद जताई जा रही है।

6 किलोमीटर क्षेत्र में होगी ड्रेजिंग

कार्ययोजना के तहत तीनों उपधाराओं को सक्रिय करने के लिए करीब 6 किलोमीटर क्षेत्र में ड्रेजिंग की जाएगी। नदी तल में जमा गाद को हटाकर जलधारा को रास्ता दिया जाएगा। योजना में नदी तल से करीब 7 मीटर गहराई तक गाद हटाने का प्रस्ताव है।

तकनीकी आकलन के अनुसार ड्रेजिंग मशीन की क्षमता करीब 500 घनमीटर प्रति घंटा होगी। मशीन से लगभग 10 मीटर चौड़ाई, 2 मीटर गहराई और 25 मीटर लंबाई के क्षेत्र में ड्रेजिंग की जाएगी। आकलन के मुताबिक करीब 40 घंटे में एक किलोमीटर क्षेत्र की गाद हटाई जा सकेगी। इस हिसाब से छह किलोमीटर क्षेत्र की ड्रेजिंग में लगभग 240 घंटे यानी करीब 10 दिन लगने का अनुमान है।

रत्तीपुर बैरिया से बरारी तक खुलेगी जलधारा

नाथनगर के रत्तीपुर बैरिया स्थित मुहाने पर ड्रेजिंग कर जलधारा को दियारा क्षेत्र से होते हुए बूढ़ानाथ और मानिक सरकार की ओर प्रवाहित करने की योजना है। इसके बाद यह धारा बरारी में मुख्य गंगा से मिलेगी।

वहीं मोहनपुर दियारा में गाद से भर चुकी पुरानी धारा के करीब एक किलोमीटर हिस्से को ड्रेजिंग के माध्यम से पुनर्जीवित किया जाएगा। बरारी पुल घाट के समीप गाद के कारण बंद पड़ी तीसरी धारा का स्रोत खोलकर उसे राघोपुर की मुख्य धारा से जोड़ने की भी योजना है।

इन तीनों धाराओं के सक्रिय होने से राघोपुर की मुख्य धारा पर पानी का दबाव विभाजित होने की उम्मीद है।

किसानों को सिंचाई में मिलेगा लाभ

गंगा की पुरानी धाराओं के सक्रिय होने से नाथनगर और आसपास के दियारा क्षेत्रों के किसानों को भी फायदा मिलने की संभावना है। नदी में सालभर पानी रहने से सिंचाई के लिए सतही जल की उपलब्धता बढ़ सकती है। इससे खेती को बढ़ावा मिलने के साथ फसल उत्पादन में भी सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।

इसके अलावा नदी के आसपास के इलाकों में भूगर्भ जलस्तर में सुधार होने की संभावना भी बताई जा रही है।

पांच लाख आबादी के पेयजल संकट में मिल सकती है राहत

गंगा की मुख्य धारा वर्तमान में वाटर वर्क्स से करीब तीन किलोमीटर दूर चली गई है। इसके कारण साल के कई महीनों में नदी के बीच अस्थायी पंपिंग व्यवस्था करनी पड़ती है।

प्रस्तावित जलधारा सक्रिय होने के बाद हनुमान घाट स्थित नगर निगम के जलशोधन संयंत्र को सालभर पर्याप्त कच्चा पानी उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। इससे भागलपुर शहर की करीब पांच लाख आबादी के लिए पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

रिवर फ्रंट और धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा

गंगा की धारा यदि दोबारा शहरी तटों के करीब पहुंचती है तो इसका असर धार्मिक और पर्यटन गतिविधियों पर भी पड़ सकता है। बरारी रिवर फ्रंट को इससे नया स्वरूप मिलने की संभावना है।

बूढ़ानाथ मंदिर, मानिक सरकार और कुप्पा घाट जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों के समीप गंगा की धारा पहुंचने से श्रद्धालुओं के लिए स्नान और पूजा-अर्चना की सुविधा बेहतर हो सकती है। वहीं नदी क्षेत्र में डॉल्फिन और अन्य जलीय जीवों की मौजूदगी से रिवर टूरिज्म को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

फिलहाल प्रस्तावित योजना का सबसे बड़ा उद्देश्य राघोपुर में गंगा के कटाव के दबाव को कम करना है। यदि तकनीकी योजना जमीन पर प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो इसका लाभ राघोपुर के साथ-साथ भागलपुर शहर और आसपास के ग्रामीण इलाकों को भी मिल सकता है।

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By न्यूज़ डेस्क

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