कहलगांव प्रखंड के ओरियप पंचायत अंतर्गत उत्तरवाहिनी गंगा नदी किनारे श्मशान घाट से सटे बट पर्वत पर अवस्थित प्राचीन बटेश्वरनाथ महादेव मंदिर सदियों से लाखों लोगों के लिये आस्था तथा तंत्र साधना का केंद्र रहा है। मुनिवर बशिष्ठ द्वारा आराधित आपरूपी महादेव बटेश्वर को बशिष्ठेश्वर नाथ महादेव भी कहा जाता है। यहां सावन, भाद्र पूर्णिमा, माघ पूर्णिमा पर बड़ा मेला लगता है तथा हजारों लोग देवाधिदेव का जलाभिषेक करते हैं। पूरे सावन मास में यहां शिवभक्तों का जमावड़ा लगा रहता है। सोमवारी को इस स्थल पर भक्तों द्वारा जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और गंगा महाआरती का दौर चलता है। .

बटेश्वर स्थान को पत्थरघाट भी कहा जाता है:

सेन और पालवंशीय शासकों के लिये भी यह स्थान आस्था का केंद्र रहा था। बटेश्वरनाथ महादेव के लिंग विग्रह के सामने दक्षिणामुखी मां काली की मूर्ति विराजमान हैं जो तांत्रिक कल्पना की रूपक मानी जाती हैं। इस स्थान को शिला संगम भी कहा जाता है। बटेश्वर स्थान को पत्थरघाट भी कहा जाता है क्योंकि नदी किनारे पत्थरों की भरमार है। कुछ दशकों पहले गंगा और कोसी नदियों का संगम स्थल भी पत्थरघाट यानि बटेश्वर स्थान रहा था इसलिये इसे शिला संगम भी कहा जाता है।.

तंत्रपीठ के रूप में भी विख्यात हैं बटेश्वरनाथ महादेव:

तंत्रपीठ के तौर पर विख्यात बटेश्वरनाथ महादेव तांत्रिकों, भगतों, साधकों तथा आदिवासी समुदाय के लोगों के लिये भी आकर्षण का केंद्र रहा है। कहा जाता है कि इनकी आराधना से भक्तों को मनोवांछित फल प्राप्त होता है। कार्तिक मास में बड़ी संख्या में लोग यहां कल्पवास भी करते हैं। इस स्थान का उल्लेख शिव पुराण, भविष्योत्तर पुराण, कालिका पुराण, कृतसार, वैवस्वत पुराण आदि में भी मिलता है। .

पूरे सावन लगता है मेला:

नागा बाबा मंदिर के महंथ कार्तिक तिवारी, बटेश्वर मंदिर के पुजारी चंद्रशेखर झा, ओरियप पंचायत के मुखिया त्रिभुवन शेखर झा तथा केंद्रीय रेलवे रेल यात्री संघ के संयोजक विष्णु खेतान ने बताया कि सोमवार को रुद्राभिषेक, मस्तकाभिषेक, गंगा महाआरती तथा अखंड हरेराम संकीर्तीन के कार्यक्रम होंगे। रेल यात्री संघ द्वारा भक्तों के लिये चाय, शर्बत, प्रसाद आदि की व्यवस्था रहेगी।

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By न्यूज़ डेस्क

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