एसडीओ मुकेश कुमार ने सोमवार को वरीय पदाधिकारी के निर्देश पर नवगछिया अनुमंडलीय कारा के अस्पताल का निरीक्षण किया। उनके साथ एसडीपीओ प्रवेंद्र भारती भी थे। निरीक्षण के दौरान एसडीओ ने पाया कि अनुमंडल कारा अस्पताल एक कमरे में अवस्थित है। जिसमें रोगी बंदी को इलाज करने के लिए भर्ती करने की व्यवस्था नहीं है। कारा का अस्पताल हाल ही में पुराने रसोईघर को भवन निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता द्वारा मरम्मत कर बनाया गया है।


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कारा अस्पताल में सिर्फ आउटडोर की ही व्यवस्था है। अस्पताल के आउटडोर में प्रतिदिन 30 से 40 बंदियों का इलाज किया जाता है। कारा में बंदियों के चिकित्सा व्यवस्था के लिए अनुमंडल अस्पताल के चिकित्सक की ड्यूटी एवं रोस्टर कारा कार्यालय को प्राप्त है। अनुमंडल कारा नवगछिया में पदस्थापित परिधापक विकास कुमार पांडे 24 घंटा सातों दिन सेवा देते हैं। अनुमंडल अस्पताल के चिकित्सकों का निर्गत ड्यूटी के अनुसार परिधापक विकास कुमार पांडे द्वारा दूरभाष से संपर्क कर उनके द्वारा बताए गए दवाओं को बंदियों को दिया जाता है।

गंभीर रूप से बीमार बंदियों के इलाज के लिए प्रभारी कारा चिकित्सक को दूरभाष पर बुलाए जाने वे आते हैं और बंदियों का इलाज करते हैं। निरीक्षण में पाया गया कि कारा के भूमिगत जल में आयरन जैसे तत्व की काफी मात्रा मौजूद है। जो कि पानी पीने लायक नहीं है। इसके निदान के लिए फिल्टर की जरूरत है। कारा में अधिकांश बंदी चर्म रोग से पीड़ित हैं। निरीक्षण के क्रम में यह भी पाया गया है कि कारा में एक बंदी एचआईवी रोगी है, एक बंदी हेपेटाइटिस बी का रोगी है व दो बंदी मानसिक रोगी हैं। जिसे समय-समय पर मायागंज अस्पताल भेजकर इलाज कराया जा रहा है।

एसडीओ ने कहा कि अनुमंडल कारा के अस्पताल में एक चिकित्सक का नियमित रूप से पदस्थापित किया जाने की आवश्यकता है। इसके साथ ही नवनिर्मित कारा अस्पताल में कम से कम तीन बेड, ड्रेसिंग टेबल व प्राथमिक उपचार की सामग्री की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट वरीय अधिकारियों को भेजी जाएगी।

बीमार बंदियों को अनुमंडल अस्पताल के डॉक्टर से फोन पर बात कर दी जाती है दवा
उपकारा में बंदियों को दी जा रही है महात्मा गांधी की जीवनी से जुड़ी जानकारी

नवगछिया उपकारा के बंदियों को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जीवनी से संबंधित पुस्तकों का अध्ययन कराया जा रहा है। इसकी शरुआत सोमवार को की गई। यह कार्यक्रम एक माह तक चलेगा। कारा विभाग ने सूबे के सभी जेलों में महात्मा गांधी की जीवनी से संबंधित पुस्तकें-एक था मोहन एवं बापू को पढ़ाए जाने का निर्देश दिया है। उपकारा अधीक्षक मनोज कुमार ने बताया कि इसके बाद उन किताबों को कैदियों के बीच वाचन कराई जा रही है। इस कार्यक्रम का मकसद यह है कि बंदी महात्मा गांधी के जीवन के बारे में जान सकें और उनसे प्रेरणा ले सकें। अगर इस कार्यक्रम से 10 फीसदी लोग भी महात्मा गांधी की जीवनी पढ़-सुनकर हिंसा का रास्ता छोड देंगे तो यह काफी होगा।

By न्यूज़ डेस्क

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