अभिभावकों से निजी स्कूल मार्च व अप्रैल माह की फीस नहीं ले सकते हैं। हालांकि, ऑनलाइन क्लास लेने वाले स्कूल मासिक फीस ले सकते हैं। लेकिन वे भी ट्रांसपोर्टेशन शुल्क नहीं ले सकते हैं।
शिक्षा विभाग ने साेमवार काे यह अादेश जारी किया। विभाग ने कहा है कि लॉकडाउन के दौरान कोई भी स्कूल बच्चों के अभिभावकों को मासिक फीस देने के लिए मजबूर नहीं कर सकते हैं। प्राथमिक शिक्षा निदेशक डॉ. रंजीत कुमार सिंह ने इस बाबत बताया कि ट्रांसपोर्टेशन सहित किसी प्रकार की फीस लॉकडाउन के दौरान नहीं ली जा सकती है।
फीस के लिए दवाब डालने की किसी तरह की शिकायत मिलने पर संबंधित स्कूल के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। निजी स्कूलों से अभिभावकों को मासिक फीस के साथ ट्रांसपोर्टेशन फीस जमा करने के लिए मैसेज आ रहे हैं। ऐसे में शिक्षा विभाग के इस निर्णय से अभिभावकों को बड़ी राहत मिलेगी। कई स्कूलों से फीस को लेकर अभिभावकों के पास मेसेज आ रहे थे। इस पर अभिभावकों में नाराजगी थी।

किताबों की होम डिलीवरी की जिम्मेदारी डीईओ की
स्कूली बच्चों के घर तक किताब वितरण की सूची जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) तैयार करेंगे। इसी सूची के आधार पर वाहन पास मिलेगा। डीएम कुमार रवि ने कहा कि सरकार के नए निर्देश के आलोक में पास वितरण की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए विकेंद्रीकरण किया गया है। बच्चों के घर तक किताब पहुंचाने को इच्छुक विक्रेताओं, स्कूलों और दुकानों की सूची बनेगी ताकि किसी तरह की परेशानी नहीं हो।
बुक डिलीवरी के पास के लिए किया आवेदन
बच्चों को घर-घर किताबें पहुंचाने के लिए अब स्कूल्स प्रबंधन खुद आगे आए हैं। सोमवार को राजधानी के दर्जन भर स्कूलों के प्रिंसिपल ने कॉन्फ्रेंस कॉल पर मीटिंग की। पाटलिपुत्र सहोदय स्कूल कॉम्प्लेक्स के अध्यक्ष डॉ. राजीव रंजन सिन्हा ने बताया कि हम लोगों ने बच्चों के घर तक किताबें पहुंचाने का निर्णय लिया है। सभी स्कूल वाहन पास के लिए आवेदन करेंगे। उन्होंने कहा कि बच्चों को किताबें देने की डीएम की पहल अच्छी है। वाहन पास के लिए डी वाई पाटिल समेत कई स्कूलों ने आवेदन किया है। शिवम् कॉन्वेंट, बाल्डविन एकेडमी, बाल्डविन सोफिया, स्कॉलर्स अबोड सहित अन्य स्कूल मंगलवार को वाहन पास आवेदन करेंगे। सभी स्कूल पुस्तक विक्रेताओं के साथ वार्ता कर चुके हैं, उनसे अनुरोध किया गया है कि वे स्कूल के मार्फत द्वारा बच्चों के घरों पर किताबों की डिलीवरी करें।

मनमानी रोकने के लिए बना है नियम
बिहार सरकार ने निजी स्कूलों की मनमानी रोकने के लिए बिहार निजी स्कूल (शुल्क विनियमन) विधेयक, 2019 बनाया है। इसके अनुसार स्कूल सभी प्रकार के शुल्क में अधिकतम 7 प्रतिशत तक की वृद्धि कर सकते हैं। निजी विद्यालय के लिए बनाए गए इस अधिनियम और इसके अधीन बनाई गई नियमावली और अधिसूचना के किसी प्रावधान का उल्लंघन करने पर प्रथम अपराध के लिए अधिकतम एक लाख रुपए तथा आगे प्रत्येक अपराध के लिए दो लाख रुपए दंड का प्रावधान है। निर्धारित दंड एक माह के भीतर नहीं जमा करने और बार-बार नियमों का उल्लंघन के लिए दोषी पाये जाने की स्थिति में निजी विद्यालय अथवा सहायता पाने वाले विद्यालय की मान्यता अथवा संबंधन रद्द करने की अनुशंसा प्रमंडलीय आयुक्त कर सकते हैं।


