भागलपुर : पति की दीर्घायु और परिवार की समृद्धि व सुरक्षा के लिए शुक्रवार को सुहागिन महिलाएं वट सावित्री पूजा करेंगी। हालांकि लॉकडाउन को लेकर उनके बीच संशय की स्थित है। इसलिए कि अगर बड़ी संख्या में व्रती महिलाएं वट वृक्ष के पास जमा होंगी जाएंगी तो कोरोना संक्रमण का खतरा बढ़ जाएगा। यह खुद के साथ-साथ अन्य के लिए भी खतरनाक साबित हो सकता है।
क्या कहते हैं ज्योतिषाचार्य : ज्योतिषाचार्य पंडित डॉ. एसएन झा कहते हैं कोरोना जैसी वैश्विक महामारी से बचाव हमारी प्राथमिकता है। ऐसी विषम परिस्थिति में व्रती सुहागिन महिलाएं वट वृक्ष की एक टहनी घर में लाकर उसे गमले या भूमि में स्थापित करें। पूजा की शुरुआत गणोश और माता गौरी से करें। इसके बाद वट वृक्ष की टहनी की पूजा त्रिदेव मानकर करे। उसकी पूजा और परिक्रमा का फल वट वृक्ष की पूजा के बराबर ही मिलेगा। इसके उपरांत सावित्री सत्यवान की पुण्य कथा का श्रवण करें। ऐसा कर आप सरकार के लॉकडाउन नियम का पालन भी करेंगी। साथ ही कोरोना से बचाव भी कर सकेंगी।

पूजा का शुभ मुहूर्त : वट सावित्री पूजा का शुभ मुहूर्त 22 मई को अमावस्या तिथि होने की वजह से पूरे दिन है। उमेश्वरनगर सबौर के पंडित चंद्रशेखर झा ने बताया कि अमावस्या तिथि 21 मई को रात 9 बजकर 34 मिनट पर प्रारंभ हो रहा है। जो 22 मई की रात 11 बजकर 8 मिनट पर समाप्त होगा। इसके बाद ज्येष्ठ शुक्ल प्रतिपदा तिथि प्रारंभ हो जाएगी।
महंगाई पर आस्था भारी
वट सावित्री पूजा को लेकर गुरुवार को फल के दुकानों पर व्रती महिलाओं की काफी भी देखी गई। पूजा सामग्रियों के दुकानों पर भी शारीरिक दूरी का लोगों ने कोई ख्याल नहीं रखा। महंगाई काफी होने के बाद भी लोगों ने मौसमी फल आम, लीची, खीरा आदि का जमकर खरीदारी की।


