मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि 14 दिसंबर को सोमवती अमावस्या है। यह दिन भगवान शिव को समर्पित है। सोमवती अमावस्या के दिन महिलाएं व्रत कर सुहाग की लंबी उम्र की कामना करती हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से सहस्र गोदान का फल मिलता है। इस दिन महिलाएं पीपल के वृक्ष का दूध, जल, पुष्प, अक्षत और चंदन से पूजा करती हैं।
इसके बाद 108 बार धागा लपेट कर परिक्रमा कर पति की दीर्घायु की कामना करती हैं। पंडित द्यानद पाण्डेय ने बताया कि अमावस्या के दिन पवित्र नदियों में स्नान का विशेष महत्व है।

कहा जाता है कि महाभारत में भीष्म ने युधिष्ठिर को इस दिन का महत्व समझाते हुए कहा था कि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने वाला मनुष्य हर रूप से सुखी-समृद्ध होगा। साथ ही वह पूर्ण रूप से स्वस्थ और सभी दुखों से मुक्त भी होगा। मान्यता यह भी है कि इस दिन स्नान करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है।


