आज 14 फरवरी है। आज भागलपुर के वीर सपूत शहीद रतन कुमार ठाकुर का शहादत दिवस है। बात 2019 की है….जब पुलवामा हमले पर पूरा देश दहल गया था। इसी हमले में भागलपुर के वीर सपूत रतन कुमार ठाकुर भी शहीद हुए थे। उस दिन पूरा देश रोया था। पर आज तीन साल बाद यहां सिर्फ उनके पिता व उनका परिवार रो रहा है। शहादत दिवस पर शहीद रतन सिंह के पिता राजनिरंजन ठाकुर ने 2019 से लेकर अब तक की दास्तां सुनाई। यह बतलाते हुए उनकी आंखें छलक उठीं।

उनके पिता की कहानी से पता चलता है कि कैसे बड़े-बड़े वादे कर वादा खिलाफी की जाती है। शहीद रतन सिंह के पिता राजनिरंजन ठाकुर आज परिवार के रोजमर्रा के खर्चों में कटौती कर अपने बेटे का शहादत दिवस मनाते हैं। इससे पता चलता है कि कैसे एक शहीद का परिवार आज अकेला हो गया है। 2019 में जब शहीद रतन कुमार ठाकुर का शव उनके गांव पहुंचा था तो मानो नेताओं का पूरा कुनबा उठकर शव पर अपनी राजनीति चमकाने पहुंच गया था।

जब तक जिंदा हूं, बेटे का शहादत दिवस मनाऊंगा

राजनिरंजन ठाकुर ने अपने बेटे रतन कुमार ठाकुर के साथ हुई घटना याद किया। उन्होंने कहा कि जबतक जिंदा हूं तब तक हर 14 फरवरी को बेटे का शहादत दिवस मनाऊंगा। इसके लिए मैं अपने दैनिक जीवन के खर्चों में कटौती करता हूं। इससे जो पैसे बचते हैं, उससे शहादत दिवस मनाता हूं। शहादत दिवस पर कोई मदद नहीं मिलने का मलाल साफ दिखता है।

श्रीनगर से फोन आया था…रतन का कोई और नंबर है क्या

उन्होंने बताया, ‘जिस समय मेरे रतन आतंकी हमले में शहीद हुए थे…उस समय श्रीनगर कंट्रोल रूम से फोन आया। आपके पास रतन का कोई नंबर है तो भेजें। उनका नंबर बंद बता रहा है। जैसे ही यह सूचना मिली, मैं मछली की तरह तड़पने लगा। इसके बाद उसी नंबर पर फोन कर हालचाल जानना चाहा। बहुत कॉल किया, पर कोई जवाब नहीं आया। इसके बाद टीवी से जानकारी मिली।’ सिसकते हुए उन्होंने बताया, ‘जब सुबह 7 बजे सीओ कंट्रोल रूम से फोन आया कि आपके बेटे का शव निकल चुका है, मेरा दिल बैठ गया। जब बेटा शहीद हुआ था तो सारा प्रशासनिक अमला उठकर आ गया था। क्या मंत्री, क्या विधायक और सांसद। सबने बड़े-बड़े वादे किए। बिहार सरकार ने भी घोषणा की थी कि शहीद परिवार को सारी सुख सुविधा मुहैया कराई जाएगी, पर आज तक एक भी वादा पूरा नहीं किया गया।’

भागलपुर सिटी में कही भी एक स्मारक लगा दीजिए…

पिता ने बताया मैं और हमारा परिवार भागलपुर में रहते हैं। मेरे साथ शहीद रतन कुमार ठाकुर की पत्नी और दो बेटे हैं। मैंने कई बार जिला प्रशासन से आग्रह किया कि बेटे शहीद रतन का भागलपुर में एक स्मारक बनवा दीजिए। पर तीन साल बीतने को है…कोई सुनने वाला नहीं है। वहीं जब बेटे शहीद हुए थे तो डीडीसी साहब ने आकर कहा था कि गांव के स्कूल का नाम शहीद रतन ठाकुर के नाम से होगा, पर वह भी नहीं हुआ। मैं जिला प्रशासन से आग्रह करता हूं कि एक स्मारक बनवा दें, मैं आभारी रहूंगा।

मैं भी बड़ा होकर फौजी बनूंगा और अपने पिता के दुश्मनों से बदला लूंगा

शहीद रतन ठाकुर के छह वर्षीय पुत्र को अपना पापा और भारतीय सेना पर गर्व है। वह पहली कक्षा में पढ़ाई करता है। महज छह साल की उम्र में वह फौजी बनने का सपना देखता है। शहीद रतन सिंह का पुत्र कृष्णा कुमार ठाकुर ने कहा कि मैं अपने पापा जैसा बनना चाहता हूं। फौजी बनकर पापा के दुश्मनों से बदला लेना चाहता हूं।

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By न्यूज़ डेस्क

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