27 सितंबर से शुरू होगा पितृ पक्ष, 16 दिनों तक गंगा घाटों पर उमड़ेगी श्रद्धालुओं की भीड़; जानें श्राद्ध की पूरी तिथियां
भागलपुर। भाद्रपद पूर्णिमा के साथ ही पितरों के निमित्त किए जाने वाले श्राद्ध और तर्पण का दौर शुरू होने जा रहा है। 26 सितंबर शनिवार को भादो पूर्णिमा का श्राद्ध किया जाएगा। इसी दिन अगस्त दान और ऋषि तर्पण का विधान भी पूरा होगा। इसके अगले दिन 27 सितंबर रविवार से आश्विन कृष्ण प्रतिपदा शुरू होने के साथ पितृ पक्ष का विधिवत आरंभ होगा।
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धार्मिक परंपरा के अनुसार पितृ पक्ष में लोग अपने दिवंगत पूर्वजों की मृत्यु तिथि के अनुसार श्राद्ध, पिंडदान और तर्पण करते हैं। यह क्रम 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ संपन्न होगा।
गंगा घाटों पर 16 दिनों तक उमड़ेगी भीड़
पितृ पक्ष शुरू होते ही भागलपुर के प्रमुख गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ने की संभावना है। बरारी सीढ़ी घाट, एसएम कॉलेज सीढ़ी घाट और पुल घाट समेत अन्य घाटों पर लोग अपने पितरों के निमित्त गंगा स्नान और तर्पण करेंगे।

भागलपुर के अलावा पूर्वी बिहार और झारखंड के आसपास के क्षेत्रों से भी लोग पितृ तर्पण और श्राद्ध के लिए गंगा घाटों पर पहुंचते हैं। 26 सितंबर को भादो पूर्णिमा के अवसर पर भी स्नान और ऋषि तर्पण के लिए घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने की संभावना है।
पूर्णिमा पर कई जगह होगी सत्यनारायण पूजा
भादो पूर्णिमा के अवसर पर भागलपुर शहर के लहरी टोला, घंटाघर चौक, नया बाजार समेत विभिन्न स्थानों पर भगवान सत्यनारायण की विशेष पूजा आयोजित की जाएगी।
ज्योतिषाचार्य पंडित आरके चौधरी के अनुसार, धार्मिक मान्यता में पितृ पक्ष को पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और तर्पण का विशेष समय माना गया है। आश्विन मास की अमावस्या को पितरों के निमित्त किए जाने वाले अनुष्ठानों के लिए विशेष महत्व दिया जाता है।
जगन्नाथ मंदिर के पंडित सौरभ मिश्रा ने धर्मशास्त्रीय मान्यताओं का उल्लेख करते हुए बताया कि पितरों के निमित्त पिंडदान और तिलांजलि को श्रद्धा से करने की परंपरा रही है। उन्होंने लोगों से अपनी सामर्थ्य के अनुसार पितरों का स्मरण और तर्पण करने की बात कही।
पितृ पक्ष में मृत्यु तिथि के अनुसार होता है श्राद्ध
पंडित अंजनी शर्मा के अनुसार, आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की तिथियों को पितृ पक्ष के रूप में जाना जाता है। इस दौरान लोग अपने पूर्वजों को जल अर्पित करते हैं और जिनकी मृत्यु जिस तिथि को हुई हो, उसी तिथि को उनका श्राद्ध करने की परंपरा है।
वर्ष के किसी भी महीने में दिवंगत हुए परिजन का श्राद्ध पितृ पक्ष में संबंधित तिथि के अनुसार किया जा सकता है। वहीं जिनकी मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं होती, उनके लिए सर्वपितृ अमावस्या का विशेष महत्व माना जाता है।
श्राद्धकर्ता के लिए बताए गए हैं कई नियम
धार्मिक परंपराओं के अनुसार पितृ पक्ष के दौरान श्राद्ध करने वाले व्यक्ति को संयम और सात्विक आचरण का पालन करना चाहिए। प्रमुख मान्यताओं में शामिल हैं—
- पितृ पक्ष के दौरान क्षौरकर्म यानी बाल और दाढ़ी कटवाने से परहेज किया जाता है।
- ब्रह्मचर्य और संयम का पालन करने की परंपरा है।
- स्नान के बाद पितरों का तर्पण किया जाता है।
- तेल और उबटन आदि के प्रयोग से परहेज किया जाता है।
- मांसाहारी भोजन से बचने की धार्मिक परंपरा है।
- पान और अन्य भोग-विलास की वस्तुओं से भी परहेज करने की मान्यता है।
धार्मिक नियम अलग-अलग परंपराओं और परिवारों में कुछ भिन्न हो सकते हैं। इसलिए विशेष विधि के लिए स्थानीय आचार्य या पुरोहित की सलाह ली जा सकती है।
पितृ पक्ष की प्रमुख तिथियां
| तारीख | श्राद्ध |
|---|---|
| 26 सितंबर | पूर्णिमा श्राद्ध |
| 27 सितंबर | प्रतिपदा श्राद्ध |
| 28 सितंबर | द्वितीया श्राद्ध |
| 29 सितंबर | तृतीया व महाभरणी श्राद्ध |
| 30 सितंबर | चतुर्थी व पंचमी श्राद्ध |
| 1 अक्टूबर | षष्ठी श्राद्ध |
| 2 अक्टूबर | सप्तमी श्राद्ध |
| 3 अक्टूबर | अष्टमी श्राद्ध |
| 4 अक्टूबर | नवमी श्राद्ध, मातृ नवमी |
| 5 अक्टूबर | दशमी श्राद्ध |
| 6 अक्टूबर | एकादशी श्राद्ध |
| 7 अक्टूबर | द्वादशी व मघा श्राद्ध |
| 8 अक्टूबर | त्रयोदशी श्राद्ध |
| 9 अक्टूबर | चतुर्दशी श्राद्ध |
| 10 अक्टूबर | सर्वपितृ अमावस्या |
पितृ पक्ष के दौरान भागलपुर और आसपास के गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने की संभावना को देखते हुए घाटों पर भीड़ और आवागमन को लेकर भी स्थानीय स्तर पर तैयारी की जरूरत रहेगी।
