नवगछिया बड़ी घाट ठाकुरबाड़ी में आयोजित एकादश अभिषेकात्मक महारूद्र यज्ञ के छठे दिन रविवार को शिव महापुराण कथा कहते हुए महंत सिया वल्लभ शरण महाराज जी ने बताया कि शिव तो स्वच्छ जल, बिल्व पत्र, कंटीले और न खाए जाने वाले पौधों के फल धूतरा आदि से ही प्रसन्न हो जाते हैं। वे तो औघड़ बाबा हैं।
वहीं शाम को मत्स्य महापुराण की कथा का वाचन करते हुए कहा कि प्रत्येक मनुष्य के अंदर तीन प्रकार के गुण होते हैं सतो गुण, रजो गुण एवं तमो गुण जिस मनुष्य के अंदर सतो गुण की प्रधानता होती है। वह सात्विक विचारों का होता है। जिस मनुष्य के अंदर रजो गुण होता है वह विलासी प्रवृत्ति का होता है एवं जिस मनुष्य के अंदर तमो गुण की प्रधानता होती है वह तामसी विचार का होता है। वहीं उन्होंने कहा कथा सुनने से कुछ नहीं होगा। कथा सुनकर आत्मसात करें तभी कल्याण होगा।

